Bihar Health: फर्जी अस्पतालों पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक, बिहार में नया रजिस्ट्रेशन कानून लागू, अवैध क्लीनिक होंगे सील, हाईकोर्ट ने की सराहना

Bihar Health: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था और अवैध नर्सिंग होमों के बढ़ते जाल पर अब सरकार ने सख्त प्रहार किया है।

Bihar Cracks Down on Fake
फर्जी अस्पतालों पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक- फोटो : social Media

Bihar Health: बिहार में  स्वास्थ्य सेवा  की दयनीय हालत सुधारने  व.अवैध क्लीनिकों पर कड़ा प्रहार, छोटे अस्पतालों के लिए नया रजिस्ट्रेशन नियम लागू किया गया हैं।बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में  सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।राज्य में अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिकों और फर्जी अस्पतालों को नियन्त्रित  करने के लिए बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने 'बिहार लघु और मध्यम स्वास्थ्य प्रतिष्ठान (स्थापना और पंजीकरण) नियमावली, 2026' को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। पटना हाइकोर्ट ने भी राज्य सरकार के इस कदम सराहना की है।हाइकोर्ट ने की सरकार और सरकारी वकील प्रशांत प्रताप की भूमिका की प्रशंसा की।

जस्टिस राजीव राय  की एकल पीठ ने भोजपुर जिले के बड़हरा थाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते राज्य सरकार की इस ठोस कार्रवाई की सराहना की।इस मामलें की सुनवाई के दौरान जब एक कथित अस्पताल की जांच रिपोर्ट सामने आई, तो पता चला कि वह महज दो कमरों का सेटअप था, जिसे किसी भी हाल में अस्पताल नहीं कहा जा सकता।

इस गंभीर मामले में कोर्ट की मदद करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार के वकील प्रशांत प्रताप के प्रयासों को पटना हाईकोर्ट  ने रिकॉर्ड पर लेते हुए विशेष सराहना की। इस मामले की गंभीरता और सरकार के कड़े रुख को देखते हुए कोर्ट ने इस पर अपनी मुहर लगाई।

हाइकोर्ट की विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कोर्ट राज्य सरकार के इस कदम की सराहना करती है।कोर्ट ने कहा कि जब अनिवार्य पंजीकरण  को पूरी कड़ाई से लागू किया जाएगा, तो इससे बिहार भर में गुपचुप तरीके से चल रहे अवैध नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिक और निजी अस्पताल पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे।

कोर्ट को इस नए सुधार की जानकारी देते हुए  अधिवक्ता  बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अधिसूचना संख्या 18/Misc.-18/2025-555(18)/स्वास्थ्य को सख्ती से लागू किया जा रहा है। उन्होने कोर्ट को आश्वस्त किया कि 1 से 40 बेड की क्षमता वाले सभी छोटे अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को अब कानूनी तौर पर काम करने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। 

उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है, जिसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए मामले को निष्पादित कर दिया।

बिहार के स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि के हस्ताक्षर से जारी इस नई नियमावली के तहत जिला स्तर पर सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा अधिकारी  की अध्यक्षता में 'जिला पंजीकरण प्राधिकरण' का गठन किया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसमें कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है।उल्लंघन और अवैध संचालन पर जुर्माने का प्रावधान हैं।

सामान्य नियमों के पहली बार उल्लंघन पर ₹10,000, दूसरी बार ₹25,000 और उसके बाद हर बार ₹50,000 का जुर्माना लगेगा। वहीं, बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल चलाने पर पहली बार ₹10,000 और दूसरी बार ₹25,000 का जुर्माना तय किया गया है।

 यदि कोई इसके बाद भी उल्लंघन करता है, तो क्लीनिक को तुरंत सील कर भारतीय न्याय संहिता  के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, निरीक्षण टीम से जानकारी छुपाने, गलत डेटा देने या बाधा डालने पर पांच लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

उन्होनें कोर्ट को बताया कि क्लीनिक मालिकों की सुविधा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है। कोई भी संस्थान मात्र ₹500 की फीस के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। आवेदन के 15 दिनों के भीतर बिना किसी प्रारंभिक जांच के 1 साल के लिए 'अस्थाई पंजीकरण प्रमाणपत्र' जारी कर दिया जाएगा, जिसे अधिकतम दो बार रिन्यू कराया जा सकता है।इन 3 सालों के भीतर अस्पतालों को स्थायी रजिस्ट्रेशन के लिए तय मानकों को पूरा करना होगा।