Bihar Diwas: श्रम शक्ति से खनिज संपदा तक, निवेशकों के लिए बिहार का हर कोना सोना

बिहार की कहानी राजगीर के छिपे खजाने तक ही सीमित नहीं है। यहां की श्रम शक्ति, खनिज संपदा और भौगोलिक रणनीतिक स्थिति बिहार को भारत के आर्थिक विकास का इंजन बना सकती है।

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बिहार... जिसका नाम आते ही अक्सर राजनीति, पलायन और पिछड़ेपन की चर्चा होने लगती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बिहार की धरती में संभावनाओं का खजाना छिपा है, जो राज्य को भारत के आर्थिक मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिला सकता है। बिहार दिवस पर इस गौरवशाली धरती की अनकही संभावनाओं को जानना जरूरी है।


श्रम शक्ति: बिहार की सबसे बड़ी पूंजी

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बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसका मानव संसाधन है। 13 करोड़ से अधिक की आबादी वाला बिहार देश भर के उद्योगों में श्रम और कौशल का भरपूर योगदान देता है। दिल्ली-मुंबई की फैक्ट्रियां हों या पंजाब-हरियाणा के खेत, बिहार के मेहनतकश लोग अपनी मेहनत से हर जगह उत्पादन बढ़ा रहे हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि बिहार की इस श्रम शक्ति का इस्तेमाल बिहार में ही बड़े उद्योगों और स्टार्टअप के विकास में किया जाए।

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खनिज संपदा: बिहार की छिपी ताकत

बिहार के 13 जिले- नवादा, नालंदा, रोहतास, गया, मुंगेर, औरंगाबाद, भागलपुर, लखीसराय, जमुई, बांका, समस्तीपुर, खगड़िया और मुजफ्फरपुर- अपने भीतर अमूल्य खनिज संपदा छिपाए हुए हैं। कोयला, बॉक्साइट, लौह-अयस्क और बेरिलियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज भंडार यहां मौजूद हैं। भारत सरकार के केंद्रीय भूवैज्ञानिक नियोजन बोर्ड ने इन क्षेत्रों में सर्वेक्षण की अनुमति दी है, जो साबित करता है कि यहां बड़े पैमाने पर खनन उद्योग की संभावना है।


सामरिक भौगोलिक स्थिति: व्यापार का स्वर्णिम द्वार

बिहार की भौगोलिक स्थिति इसे भारत और पड़ोसी देशों के बीच व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना सकती है। नेपाल और भूटान के साथ इसकी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण बिहार में निर्मित उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार तैयार है। इसके अलावा, बिहार बांग्लादेश, म्यांमार और पूर्वोत्तर भारत को माल की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 



उत्पादन केंद्र बनने की संभावना

बिहार न केवल अपनी बल्कि 75 करोड़ से अधिक की आबादी के लिए उत्पादन केंद्र बन सकता है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और यहां तक कि नेपाल और भूटान में भी बिहार के तैयार उत्पादों की मांग हो सकती है। गंगा नदी में जलमार्गों और ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर के विकास से बिहार से निर्यात की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी।


उद्यमिता और निवेश के लिए उपजाऊ भूमि

बिहार में स्टार्टअप और नए उद्योगों के लिए माहौल बनाया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार प्रोत्साहन योजनाएं ला रही है। यहां के कृषि क्षेत्र, हस्तशिल्प उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेशकों के लिए असीमित संभावनाएं हैं।


ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में विकास

बिहार में ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर भी तेजी से काम हो रहा है। सौर ऊर्जा, हरित ऊर्जा और स्मार्ट मीटरिंग के जरिए बिजली की समस्या का समाधान किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी परियोजनाएं और बेहतर कनेक्टिविटी बिहार को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना रही हैं।

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