Bihar Crime: रूबी कुमारी निकली भ्रष्टाचार की शातिर खिलाड़ी! गहना,लाखो रुपए, स्कॉर्पियो पर पदनाम वाला बोर्ड,गजब का खेल

Bihar Crime: किशनगंज की DPO रूबी कुमारी पर आरोप है कि महज सात वर्षों की सरकारी सेवा में उन्होंने 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की। ....

Bihar DPO Under EOU Scanner
DPO रूबी कुमारी निकली भ्रष्टाचार की शातिर खिलाड़ी! - फोटो : X

Bihar Crime:  बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। किशनगंज की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रूबी कुमारी आर्थिक अपराध इकाई  की जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि महज सात वर्षों की सरकारी सेवा में उन्होंने 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की। जांच एजेंसी को उनके और पति गौरव कुमार के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और ऋण से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। स्कूलों में निरीक्षण के नाम पर प्रधानाध्यापकों और निजी विद्यालय संचालकों से कथित वसूली के आरोप भी सामने आए हैं।

स्कूलों की जांच के नाम पर वसूली का आरोप

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रूबी कुमारी अक्सर विद्यालयों में मध्याह्न भोजन वितरण के समय अथवा उसके बाद निरीक्षण करने पहुंचती थीं। उस समय कई विद्यार्थी भोजन करने के बाद घर जा चुके होते थे और विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति कम हो जाती थी। आरोप है कि वह प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से विद्यार्थियों की संख्या कम होने का जवाब मांगती थीं। इसके अलावा बच्चों के स्कूल बैग की गिनती और मध्याह्न भोजन के लिए उपलब्ध कराए गए चावल के सीलबंद बोरों का वजन भी करवाती थीं।विद्यालय कर्मियों का आरोप है कि निर्धारित वजन से कम चावल मिलने की स्थिति में प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदार ठहराया जाता था। जबकि विद्यालय प्रबंधन का कहना था कि चावल विभाग से सीलबंद बोरे में प्राप्त होता है। आरोप है कि निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने के नाम पर शिक्षकों और विद्यालय संचालकों पर मानसिक दबाव बनाया जाता था तथा अवैध धन की मांग की जाती थी।

BRP और निजी चालक की भूमिका की भी जांच

इस प्रकरण में एक स्थानीय ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) और निजी चालक की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों अक्सर DPO के साथ विद्यालयों के निरीक्षण में जाते थे। आरोप है कि प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और निजी विद्यालय संचालकों से कथित तौर पर धन की मांग करने तथा दबाव बनाने में उनकी भूमिका रहती थी। एक शिक्षक ने जांच एजेंसी से इन दोनों व्यक्तियों से पूछताछ करने की मांग की है।

स्कॉर्पियो पर पदनाम वाला बोर्ड छिपाने का आरोप

EOU की पड़ताल में रूबी कुमारी की स्कॉर्पियो भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब 11.50 लाख रुपये की स्कॉर्पियो खरीदी थी। वाहन पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी का बोर्ड लगा रहता था, लेकिन कथित तौर पर विद्यालयों में निरीक्षण के लिए पहुंचने से पहले चालक या साथ मौजूद BRP उस बोर्ड को ढक देते थे। इससे उनकी सरकारी पहचान सामने नहीं आने देने की बात कही जा रही है।जांच में यह भी सवाल उठा है कि उन्होंने सरकारी अभिलेखों में स्कॉर्पियो के स्थान पर स्कूटी की जानकारी क्यों दी थी। आरोप है कि स्थायी सरकारी सेवा में आने के महज एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने यह महंगी गाड़ी खरीद ली थी।

कटिहार से शुरू हुआ सफर, किशनगंज तक पहुंची पोस्टिंग

रूबी कुमारी मूल रूप से कटिहार के ऑफिसर्स कॉलोनी की निवासी बताई जाती हैं। वह पहले नियोजित शिक्षिका थीं। वर्ष 2018 में उन्होंने BPSC की 56वीं से 59वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा दी और सफल होने के बाद वर्ष 2019 में शिक्षा विभाग में योगदान किया। उनकी पहली पदस्थापना पूर्णिया में हुई। इसके बाद वर्ष 2023 में कटिहार स्थानांतरण हुआ, जहां वह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी बनीं। वर्ष 2025 में उनका स्थानांतरण किशनगंज कर दिया गया।उनके पति गौरव कुमार वर्ष 2004 से रेलवे में कार्यरत हैं। पहले वह सहायक लोको पायलट थे और वर्तमान में कटिहार स्टेशन पर टिकट कलेक्टर  के पद पर कार्यरत बताए गए हैं।

तीन बैंक खाते

जांच एजेंसी अब इन खातों के सभी वित्तीय लेन-देन का ब्योरा खंगाल रही है। खास तौर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित तौर पर अर्जित धनराशि किन माध्यमों से संपत्तियों में निवेश की गई और शेष रकम कहां रखी गई।

10 करोड़ की संपत्ति और संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल

सात वर्षों की सरकारी सेवा में 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के आरोप ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। EOU अब जमीन, G+4 अपार्टमेंट, वाहन, बैंक खातों, संदिग्ध ऋण और अन्य वित्तीय निवेशों की जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य संपत्ति के वास्तविक स्रोत और वैध आय के बीच अंतर का पता लगाना है। फिलहाल रूबी कुमारी और उनके पति से जुड़ी संपत्तियों तथा वित्तीय लेन-देन की पड़ताल जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और कथित अवैध संपत्ति का पूरा ब्योरा सामने आ सकेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट