बिहार के सभी जिलाधिकारियों को मिली 'सुपर पावर', होंगे ये असीमित अधिकार, आम जनता के लिए क्या है इसमें?
बिहार सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 के तहत राज्य के सभी जिलाधिकारियों की शक्तियों को अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है।
Patna - बिहार सरकार के गृह विभाग (विशेष शाखा) ने राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है । अधिसूचना संख्या-2840/सी के माध्यम से सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 (NSA) की धारा-3 की उपधारा (3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जिलाधिकारियों के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया है । यह आदेश 18 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से जारी किया गया है ।
तीन महीने की अवधि के लिए विस्तार
सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, राज्य के सभी जिला दण्डाधिकारी (District Magistrates) आगामी 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक इस विशेष शक्ति का प्रयोग कर सकेंगे । यह आदेश गृह विभाग की पिछली अधिसूचना संख्या-13122 (दिनांक 19.12.2025) के निरंतरता में जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय सीमाओं के भीतर सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है ।
प्रशासनिक प्रक्रिया और कार्यान्वयन
इस अधिसूचना को बिहार के राज्यपाल के आदेश से संयुक्त सचिव अमलेन्दु कुमार सिंह द्वारा निर्गत किया गया है । विभाग ने इस आदेश की प्रतिलिपि ई-गजट कोषांग और सभी जिला पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी है । साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे विभागीय वेबसाइट पर भी अपलोड करने का निर्देश दिया गया है ताकि सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी उपलब्ध रहे ।
इन शक्तियों के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
निवारक निरोध (Preventive Detention) का अधिकार: इस अधिनियम के तहत जिलाधिकारियों के पास यह शक्ति होती है कि वे किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने का आदेश दे सकते हैं, यदि उन्हें लगता है कि वह व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) के लिए खतरा पैदा कर सकता है ।
क्षेत्राधिकार की सीमा: सभी जिला दण्डाधिकारी इन शक्तियों का प्रयोग अपने-अपने क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के भीतर ही कर सकेंगे ।
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अवधि का विस्तार: यह आदेश पूर्व में जारी अधिसूचना (संख्या-13122, दिनांक 19.12.2025) के अनुक्रम में जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि इन शक्तियों की समय सीमा को आगे बढ़ाया गया है ।
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कानूनी आधार: यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 की धारा-3 की उपधारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा लिया गया है ।
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