बिहार के सरकारी अस्पतालों को मिली 'संजीवनी': 1010 डॉक्टरों की नियुक्ति का आदेश जारी, लिस्ट जारी

बिहार सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों के लिए 1010 जूनियर रेजिडेंट्स की बहाली का आदेश जारी कर दिया है। ये नियुक्तियां एक साल के लिए की गई हैं

बिहार के सरकारी अस्पतालों को मिली 'संजीवनी': 1010 डॉक्टरों क

Patna -  बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के विभिन्न राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों में 1010 जूनियर रेजिडेंट्स (JR) की नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह बहाली बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) की अनुशंसा के आधार पर की गई है, जिससे राज्य के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी दूर होगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

एक वर्षीय टेन्योर पद पर हुई है बहाली 

विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इन सभी चिकित्सकों की नियुक्ति एक वर्षीय टेन्योर पदों पर की गई है। इनका मुख्य कार्य राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों में चिकित्सीय कार्यों का सुचारू संचालन और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों को पूरा करना होगा। चयनित डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से अपने आवंटित पोस्टिंग प्लेस पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

मेडिकल कॉलेजों में सुधरेगी स्वास्थ्य सेवाएं 

इन नियुक्तियों से पटना के PMCH और NMCH सहित गया के ANMMCH, मधेपुरा के JNKTMCH और अन्य जिलों के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। जूनियर रेजिडेंट्स की मौजूदगी से खासकर इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी और वार्ड ड्यूटी में सीनियर डॉक्टरों को काफी सहयोग मिलेगा, जिसका सीधा लाभ बिहार के आम मरीजों को होगा।

योगदान के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी 

स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्ति पत्र में स्पष्ट किया है कि सभी नवनियुक्त डॉक्टरों को अपने पदस्थापन स्थल के प्राचार्य या अधीक्षक के समक्ष योगदान देना होगा। योगदान के समय उन्हें अपने सभी मूल प्रमाण पत्र और फोटो पहचान पत्र साथ लाने होंगे। साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया है कि यदि कोई जूनियर रेजिडेंट बिना सूचना के लगातार 15 दिनों तक अनुपस्थित रहता है, तो उसका टेन्योर स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा।

निजी प्रैक्टिस पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध 

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन पदों पर कार्यरत डॉक्टर अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी प्रकार की निजी प्रैक्टिस (Private Practice) नहीं कर सकेंगे। उन्हें केवल आकस्मिक अवकाश ही देय होगा। विभाग ने सभी संबंधित जिला पदाधिकारियों और सिविल सर्जनों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे।