बालू घाटों की नीलामी में सुस्ती पड़ी भारी: मंत्री के आदेश पर पटना-गया समेत 13 जिलों के माइनिंग अफसरों को नोटिस, 7 दिन का मिला अल्टीमेटम
जनवरी महीने की पहली ही समीक्षा बैठक में खान एवं भू-तत्व विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पटना सहित 13 जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि राजस्व संग्रह में सुस्ती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
Patna - बिहार में बालू घाटों की नीलामी और राजस्व वसूली को लेकर सरकार ने अब 'आर-पार' की रणनीति अपना ली है। जनवरी महीने की पहली ही समीक्षा बैठक में खान एवं भू-तत्व विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पटना सहित 13 जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि राजस्व संग्रह में सुस्ती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री के निर्देश पर 'एक्शन मोड' में विभाग
खान एवं भू-तत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के कड़े निर्देशों के बाद विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में जिलों के खनिज पदाधिकारियों की जमकर क्लास लगी। राजस्व संग्रह में पिछड़ने वाले अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर वसूली बढ़ाकर विभाग को रिपोर्ट सौंपें।
इन 13 जिलों के अधिकारियों को मिला नोटिस
कम राजस्व संग्रह और विभागीय कार्यों में ढिलाई बरतने पर जिन जिलों के अफसरों से जवाब तलब किया गया है, उनमें शामिल हैं: रोहतास, पटना, गया, जहानाबाद, लखीसराय, मुंगेर, बेगूसराय, वैशाली, शिवहर, कटिहार, मधुबनी, भागलपुर, सारण एवं मधेपुरा।
7 दिनों के भीतर बालू घाटों की नीलामी का लक्ष्य
बैठक में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण और सफेद व पीले बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी की जाए। दंड मद (Fine) में की जा रही कार्रवाइयों में ठोस प्रगति दिखे। अवैध खनन की शिकायतों का निष्पादन अब केवल एक दिन के भीतर करना होगा। अनिलामित घाटों की नीलामी के लिए जिलाधिकारियों को तत्काल पत्र भेजा जाए।
भ्रष्टाचार और लापरवाही पर 'जीरो टॉलरेंस'
निदेशक मनेश कुमार मीणा ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संस्थान से अवैध खनन की सूचना मिलती है, तो उस पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। एक सप्ताह बाद इन जिलों की फिर से समीक्षा की जाएगी, और यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मिली, तो अधिकारियों पर और भी कड़ी गाज गिर सकती है।