बिहार म्यूजियम की वैश्विक उपलब्धि पर निशांत का बड़ा संदेश, 'पापा नीतीश' का नाम लेकर बिहारवासियों से की खास अपील

अपने संदेश में निशांत ने कहा कि जर्मनी के म्यूनिख से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय यात्रा पत्रिका 'वर्थ अ जर्नी' (Worth a Journey) की ओर से बिहार म्यूजियम को दुनिया में नौवां और एशिया में पहला स्थान दिया जाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी विजन और दृ

Nihant on Bihar Museum
Nihant on Bihar Museum- फोटो : news4nation

Bihar Museum : बिहार म्यूजियम को दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में नौवां स्थान और एशिया में पहला स्थान मिलने पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर इस उपलब्धि को बिहार के लिए ऐतिहासिक गौरव का क्षण बताया। साथ ही बिहार सहित देशवासियों से अपील की कि वे बिहार के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों को देखने के लिए यहां आएं।


अपने संदेश में निशांत  ने कहा कि जर्मनी के म्यूनिख से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय यात्रा पत्रिका 'वर्थ अ जर्नी' (Worth a Journey) की ओर से बिहार म्यूजियम को दुनिया में नौवां और एशिया में पहला स्थान दिया जाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी विजन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। नीतीश कुमार ने 9 जुलाई 2013 को इस भव्य संग्रहालय की नींव रखकर बिहार की समृद्ध सभ्यता और गौरवशाली अतीत को विश्व पटल पर स्थापित करने की परिकल्पना की थी। आज यह सपना अंतरराष्ट्रीय पहचान के रूप में सामने आया है। निशांत ने इस उपलब्धि के लिए नीतीश कुमार के प्रति आभार जताते हुए समस्त बिहारवासियों को बधाई दी।


वर्थ अ जर्नी की रिपोर्ट में क्या है खास?

'वर्थ अ जर्नी' की 2026 की 'वर्ल्ड्स 100 बेस्ट म्यूजियम' सूची में बिहार म्यूजियम को नौवां स्थान मिला है। यह एशिया का सर्वोच्च रैंकिंग वाला संग्रहालय है और सूची में शामिल होने वाला भारत का एकमात्र संग्रहालय भी है। इसने न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट (10वां स्थान) और पेरिस के लूव्र म्यूजियम (31वां स्थान) को पीछे छोड़ दिया है। सूची में पहला स्थान मेक्सिको के Museo Nacional de Antropología को मिला है, जबकि स्पेन का Museo del Prado दूसरे और डेनमार्क का Louisiana Museum of Modern Art तीसरे स्थान पर है। पत्रिका के मुताबिक, रैंकिंग में डेटा विश्लेषण, पर्यटकों की प्रतिक्रियाओं और स्थल पर किए गए मूल्यांकन को शामिल किया गया है। 

 


पटना म्यूजियम और बिहार म्यूजियम का क्या है संबंध?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग पुराने पटना म्यूजियम को नहीं, बल्कि आधुनिक बिहार म्यूजियम को मिली है। हालांकि, बिहार म्यूजियम की स्थापना के पीछे पटना म्यूजियम की समृद्ध विरासत और वहां रखे पुरातात्विक संग्रह को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करने की जरूरत भी एक बड़ी वजह रही। 1917 में स्थापित पटना म्यूजियम में हजारों ऐतिहासिक वस्तुएं संग्रहित थीं, लेकिन जगह की कमी के कारण इनमें से बहुत कम वस्तुओं को प्रदर्शित किया जा पाता था। इसी जरूरत को देखते हुए एक आधुनिक और विशाल संग्रहालय की परिकल्पना की गई। पटना म्यूजियम की कई महत्वपूर्ण प्राचीन कलाकृतियां बिहार म्यूजियम में स्थानांतरित की गईं। 

 


बिहार म्यूजियम का इतिहास और खासियत

पटना के बेली रोड पर स्थित बिहार म्यूजियम की आधारशिला 9 जुलाई 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रखी थी। अगस्त 2015 में इसके कुछ हिस्सों का उद्घाटन हुआ, जबकि अक्टूबर 2017 में शेष दीर्घाओं को भी आम लोगों के लिए खोल दिया गया। 13 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस संग्रहालय की वास्तुकला में भारतीय और जापानी डिजाइन का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां पाषाण काल से लेकर आधुनिक बिहार तक के इतिहास को दर्शाया गया है। 


संग्रहालय की प्रमुख धरोहरों में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की प्रसिद्ध दीदारगंज यक्षी, प्राचीन मूर्तियां, दुर्लभ सिक्के, पांडुलिपियां, कांस्य प्रतिमाएं और लोककलाएं शामिल हैं। बच्चों के लिए विशेष चिल्ड्रेन गैलरी भी बनाई गई है। यही वजह है कि यह संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं का संग्रह नहीं, बल्कि बिहार की सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक यात्रा को समझने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।