Bihar Panchayat Election 2026: बिहार पंचायत चुनाव की तारीख पर सस्पेंस बरकरार, आरक्षण रोस्टर पर टिकी दावेदारों की निगाह, 2026 या 2027?कब होगा इलेक्शन पढ़िए

Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में अगला पंचायत चुनाव अब सिर्फ मतदान की तारीख का इंतजार नहीं, बल्कि गांवों के पूरे सियासी नक्शे के नए सिरे से तैयार होने की कवायद बन गया है। ...

Bihar Panchayat Polls Begin With Delimitation Reservation Ho
बिहार पंचायत चुनाव की तारीख पर सस्पेंस बरकरार- फोटो : social Media

Bihar Panchayat Election 2026:  बिहार में अगला पंचायत चुनाव अब सिर्फ मतदान की तारीख का इंतजार नहीं, बल्कि गांवों के पूरे सियासी नक्शे के नए सिरे से तैयार होने की कवायद बन गया है। पंचायत चुनाव की तैयारी परिसीमन से शुरू हो रही है। राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के तहत पंचायत क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर किया जाएगा। इसी के साथ ग्राम पंचायत, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र, पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाएं तय होंगी।

दरअसल, परिसीमन महज नक्शे पर लकीर खींचने की कवायद नहीं है। इसका सीधा असर इस बात पर पड़ेगा कि कौन सा गांव किस पंचायत में रहेगा, कौन सा वार्ड किस क्षेत्र का हिस्सा बनेगा और किस सीट पर किस वर्ग का आरक्षण लागू होगा। बिहार में फिलहाल 8,053 ग्राम पंचायत, 533 पंचायत समिति और 38 जिला परिषद हैं। 2021 के पंचायत चुनाव में कुल 2,47,671 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए थे।इनमें 8,067 मुखिया, 8,067 सरपंच, 11,095 पंचायत समिति सदस्य और 1,160 जिला परिषद सदस्य के पद शामिल थे। परिसीमन के बाद यदि पंचायतों और निर्वाचन क्षेत्रों की संरचना बदलती है तो हजारों मौजूदा प्रतिनिधियों और नए दावेदारों का सियासी समीकरण भी उलट सकता है।

1.15 लाख वार्ड, लेकिन असली खेल आरक्षण रोस्टर का

बिहार में करीब 1.15 लाख वार्ड हैं और पंचायत चुनाव में सबसे ज्यादा हलचल आरक्षण को लेकर रहती है। परिसीमन के बाद आरक्षण रोस्टर तैयार होगा। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण तय किया जाएगा। पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान है।यानी जिस सीट पर आज कोई सामान्य वर्ग का उम्मीदवार चुनावी तैयारी में जुटा है, नई आरक्षण व्यवस्था में वही सीट आरक्षित हो सकती है। ऐसे में कई संभावित प्रत्याशियों का पूरा चुनावी गणित धराशायी हो सकता है।

2011 की जनगणना बनेगी आधार

परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाना है। यानी करीब 15 साल पुराने जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की सीमाएं तय होंगी। इस दौरान गांवों की आबादी, भौगोलिक स्वरूप और सामाजिक संरचना में काफी बदलाव आया है। बावजूद इसके मौजूदा नियमों और उपलब्ध जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

2026 या 2027? चुनाव की तारीख पर सस्पेंस

2021 में पंचायत चुनाव 11 चरणों में हुए थे। मतदान 24 सितंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर तक चला था। इस बार परिसीमन, आरक्षण, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों के निर्धारण की पूरी प्रक्रिया के बाद ही चुनाव कार्यक्रम सामने आएगा। यही वजह है कि 2026 में चुनाव होने की संभावना को लेकर संशय है और प्रक्रिया 2027 तक खिंचने की चर्चा भी तेज है।अगर चुनाव में देरी होती है तो मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था कैसे चलेगी, यह भी बड़ा सवाल होगा। संविधान का अनुच्छेद 243E पंचायतों के पांच वर्ष के कार्यकाल और समय पर चुनाव कराने की व्यवस्था से जुड़ा है।

फिलहाल गांवों में नजरें चुनाव की तारीख से ज्यादा नई पंचायत सीमा और आरक्षण रोस्टर पर टिकी हैं। परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ते ही बिहार के ग्रामीण इलाकों में सियासी बिसात फिर से बिछने लगेगी और कई पुराने समीकरणों के साथ-साथ नए दावेदारों की किस्मत का फैसला भी इसी नक्शे और रोस्टर से तय होगा।