Bihar Police Welfare : शहीद और दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों के लिए 34 करोड़ का राहत पैकेज जारी
बिहार पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ 'सैलरी पैकेज एग्रीमेंट' के तहत 59 दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों के लिए 34.10 करोड़ रुपये की बीमा राशि मंजूर की है। इसमें दो परिवारों को 2-2 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।
बिहार पुलिस अपने उन जवानों और अधिकारियों के परिवारों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा देने जा रही है, जिन्होंने पिछले डेढ़ साल में अपनी जान गंवाई है। पुलिस मुख्यालय ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ हुए 'सैलरी पैकेज एग्रीमेंट' के तहत 59 दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों के लिए कुल 34 करोड़ 10 लाख रुपये की बीमा राशि जारी करने का निर्णय लिया है। अपर पुलिस महानिदेशक (बजट, अपील एवं कल्याण) द्वारा जारी इस सूची का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में सेवा देने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों को संबल प्रदान करना है।
इन परिवारों को मिलेगी 2-2 करोड़ रुपये की राशि
बीमा राशि के वितरण में पदों और एग्रीमेंट की शर्तों के आधार पर सहायता तय की गई है। विशेष रूप से, नवादा में तैनात रहे सहायक अवर निरीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह और मधेपुरा के पुलिस अवर निरीक्षक संजय कुमार शुक्ला के आश्रितों को दो-दो करोड़ रुपये की सबसे बड़ी बीमा राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, नालंदा के हवलदार बिनोद कुमार के परिवार को 1.80 करोड़ रुपये और पटना, आरा, भागलपुर समेत कई अन्य जिलों के पुलिसकर्मियों के परिजनों को 1.70-1.70 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी।
विकलांग अधिकारी और अन्य आश्रितों को राहत
यह योजना केवल मृत्यु तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्यूटी के दौरान स्थायी शारीरिक क्षति झेलने वाले जवानों को भी मदद पहुँचा रही है। रोहतास के पुलिस अवर निरीक्षक मनोज कुमार सिंह को ड्यूटी के दौरान विकलांग होने पर 75 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा, करीब साढ़े तीन दर्जन अन्य दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये की बीमा राशि देने की सूची तैयार की गई है, जिससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले सिपाहियों और हवलदारों के परिवारों को राहत मिल सकेगी।
आर्थिक सुरक्षा और विभाग की प्रतिबद्धता
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, बीमा राशि का यह वितरण पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैंक के साथ किए गए विशेष समझौतों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिपाही से लेकर कमांडो स्तर तक के हर जवान का परिवार भविष्य में आने वाले संकटों से सुरक्षित रहे। विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल सेवारत पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि कर्तव्य पथ पर बलिदान देने वालों के प्रति सम्मान भी प्रकट होता है।