Bihar Police Dial 112:बिहार में अब सिर्फ 11 मिनट में मदद,डायल-112 ने बदला पुलिसिंग का चेहरा,क्या है नया प्लान?

बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के नागरिकों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'डायल-112' (इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम - ERSS) परियोजना बेहद कारगर साबित हो रही है।

Bihar Police Dial 112 report and future plan
डायल-112 ने बदला पुलिसिंग का चेहरा - फोटो : news 4 nation

बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के नागरिकों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'डायल-112' (इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम - ERSS) परियोजना बेहद कारगर साबित हो रही है। 08 जुलाई 2022 को शुरू हुई इस सेवा के माध्यम से अब तक प्रदेश के लगभग 55 लाख से अधिक नागरिकों को आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। वर्तमान में राज्य के किसी भी स्थान से कॉल, एसएमएस (112 इंडिया ऐप), एसओएस और वेब पोर्टल के माध्यम से 24 घंटे कभी भी यह सहायता प्राप्त की जा सकती है। यह एकल हेल्पलाइन नंबर पुलिस, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और बाल हेल्पलाइन जैसी सभी आपातकालीन सेवाओं को एक साथ जोड़ता है।


रिस्पॉन्स टाइम में भारी सुधार, प्रतिदिन 6500 से ज्यादा लोगों को मिल रही त्वरित सहायता

इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि इसके रिस्पॉन्स टाइम (आपातकालीन वाहन के पहुंचने का समय) में आया जबरदस्त सुधार है। वर्तमान में राज्य के सभी क्षेत्रों में औसतन 11 मिनट से भी कम समय में पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड की आपातकालीन सेवाएं पहुंच रही हैं। इसके लिए पूरे बिहार में 1833 ERVs वाहन (1283 चार पहिया और 550 दो पहिया) मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। आज राज्य में प्रतिदिन औसतन 6500 से अधिक नागरिकों को इस आपातकालीन सेवा का लाभ मिल रहा है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी को दर्शाता है। विशेष बात यह है कि पटना स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में सभी कॉल उठाने वाली 346 कर्मी प्रशिक्षित महिला पुलिस कर्मचारी हैं।


अपराधों में आई कमी: सड़क दुर्घटना, घरेलू हिंसा और विवादों में डायल-112 बना मददगार

स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) के आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि डायल-112 की मुस्तैदी के कारण वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में राज्य के भीतर हत्या के मामलों में लगभग 22%, लूट में 38%, तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में करीब 21% की बड़ी कमी दर्ज की गई है। अब तक प्राप्त शिकायतों के विवरण के अनुसार, घरेलू हिंसा और महिला व बच्चों से जुड़े 4,69,347 से अधिक मामलों में तुरंत सहायता पहुंचाई गई। इसके अलावा, स्थानीय विवाद व मारपीट के 29.97 लाख से अधिक मामलों को सुलझाया गया, जबकि 2.39 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाई गई और आगजनी के 1.30 लाख से अधिक मामलों में तुरंत दमकल टीम भेजी गई।

'सुरक्षित सफर सुविधा' से सशक्त हुईं महिलाएं, नागरिकों से लिया जा रहा फीडबैक

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बिहार पुलिस ने सितंबर 2024 में "सुरक्षित सफर सुविधा" की शुरुआत की थी, जिसे लागू करने वाला बिहार देश का तीसरा राज्य बना। इसके अंतर्गत अकेले सफर करने वाली महिलाएं अपनी ट्रिप की जानकारी डायल-112 के साथ साझा कर सुरक्षित गंतव्य तक पहुंच सकती हैं, जिस दौरान उन पर तकनीकी रूप से नजर रखी जाती है और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन वाहन भेजा जाता है। अब तक 217 महिलाओं को इसके तहत सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा, नागरिक केंद्रित पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए डायल-112 पर सहायता पाने वाले नागरिकों से लगातार 'कॉल बैक' के जरिए फीडबैक लिया जाता है ताकि सेवाओं में आवश्यक सुधार किए जा सकें।


भविष्य की कार्ययोजना: राजीव नगर में ₹172.80 करोड़ से बनेगा नया भवन और शुरू होगा NGERSS

बिहार पुलिस मुख्यालय ने डायल-112 को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत पटना के राजीव नगर में 27 कट्ठा भूमि पर ₹172.80 करोड़ की लागत से ERSS का नया भव्य कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भवन बनाया जा रहा है। इसके साथ ही, गयाजी (MERC) में एक मिरर साइट इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर का निर्माण कार्य पूरा किया जाना है। भविष्य में इस परियोजना को NGERSS (नेक्स्ट जनरेशन ERSS) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें MIS/एनालिटिक्स रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया इंटीग्रेशन, ऑटोमेटेड फीडबैक मैकेनिज्म और CCTNS, रेलवे व NHAI के साथ समन्वय जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल होंगी। वर्तमान में बढ़ते लोड को देखते हुए 6 नोड और 300 टीबी स्टोरेज क्षमता वाले आधुनिक सर्वर को खरीदने की प्रक्रिया भी जारी है।