बिहार पुलिस का बड़ा फैसला: अगले 6 महीने में पूरी तरह डिजिटल होगा अनुसंधान, ऑनलाइन ही दाखिल होंगे आरोप पत्र
Bihar Police News : बिहार पुलिस अब पूरी तरह से हाईटेक होने जा रही है। अगले 6 महीने में कागजी प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो जाएगी। अनुसंधान पूरी तरह डिजिटल होगा और आरोप पत्र ऑनलाइन ही दाखिल होंगे .....
Patna : बिहार में पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ उभरते नए तौर-तरीकों से निपटने के लिए बिहार पुलिस अब पूरी तरह से हाईटेक होने जा रही है। वर्ष 2024 में लागू नए आपराधिक कानूनों के तहत कांडों के अनुसंधान और विचारण में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय ने पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को सेवाकालीन आधुनिक तकनीकों, उन्नत अनुसंधान विधियों तथा फॉरेंसिक विज्ञान का विशेष प्रशिक्षण देना अनिवार्य कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को अधिक सक्षम और तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर समाज में कानून का राज स्थापित करना है।
फॉरेंसिक और डीएनए जांच के लिए साझा प्रयास
अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और साक्ष्य-आधारित बनाने के लिए राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (सीआईडी, बिहार) ने विधि विज्ञान सेवा निदेशालय (DFSS) के सहयोग से बिहार पुलिस मुख्यालय के सभागार में जैविक विज्ञान पर दो दिवसीय सैटेलाइट सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में कुल 40 फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ थर्मो फिशर, सिंटोल, क्वाइजेन और हाई-मीडिया जैसी चार प्रमुख वैश्विक उपकरण निर्माता कंपनियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान डीएनए विश्लेषण (माइक्रोसेटेलाइट डीएनए) से संबंधित विभिन्न स्वदेशी एवं कम लागत वाले उपकरणों के विकास और प्रदर्शन पर विस्तृत चर्चा की गई, जिससे हत्या, अपहरण और सम्पत्तिमूलक अपराधों के वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में मदद मिलेगी।
सीसीटीएनएस और ई-साक्ष्य ऐप से बढ़ी पारदर्शिता
अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्षेत्रीय पुलिस पदाधिकारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का प्रभावी उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। इसी क्रम में, अनुसंधान प्रक्रिया में गति लाने के लिए थाना स्तर पर सीसीटीएनएस (CCTNS) का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिसके तहत जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 3,53,949 केस डायरी और 1,12,520 एफआईआर दर्ज की गईं। इसके साथ ही, घटनास्थल के निरीक्षण, तलाशी, जब्ती और पीड़ितों के बयानों की निष्पक्ष आॅडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भारत सरकार द्वारा विकसित 'ई-साक्ष्य ऐप' (e-Sakshya App) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें इस अवधि के दौरान कुल 68,844 विशिष्ट आईडी (SIDs) बनाई गई हैं।
बच्चों की सुरक्षा और अपराधियों के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण
बिहार पुलिस अपराधियों की ट्रैकिंग और पीड़ितों की सुरक्षा के लिए कई एकीकृत प्रणालियों पर काम कर रही है। लापता और पीड़ित नाबालिग बच्चों की त्वरित बरामदगी के लिए 'मिशन वात्सल्य पोर्टल' पर उनकी पूर्ण विवरणी और फोटो अपलोड करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास के सत्यापन के लिए 'इ-प्रिजंस' (e-Prisons) प्रणाली और विभिन्न विभागों के बीच त्वरित सूचना साझा करने के लिए 'आईसीजेएस' (ICJS) यानी इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। सड़क हादसों के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए 'इ-राड' (e-RAD) ऐप तथा अपराधियों के फिंगरप्रिंट मिलान के लिए 'नफ़िस' (NAFIS) पोर्टल का सहारा लिया जा रहा है, जिसके जरिए शुरुआती चार महीनों में 40,416 नए नामांकन किए गए हैं।
6 महीने का अल्टीमेटम: पूरी तरह बंद होगी कागजी प्रक्रिया
अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने राज्य में तकनीक आधारित पुलिसिंग को पूरी तरह लागू करने के लिए एक समय-सीमा तय कर दी है। विभाग का प्रयास है कि अगले 6 महीने की अवधि के भीतर अनुसंधान से जुड़े सभी कार्यों को अनिवार्य रूप से डिजिटल मोड में स्थानांतरित कर दिया जाए। इस निर्धारित अवधि के बीत जाने के बाद, किसी भी प्राथमिकी (FIR) से संबंधित आरोप पत्र (Charge Sheet) अथवा अंतिम प्रपत्र (Final Report) भौतिक रूप से स्वीकार नहीं किए जाएंगे और उन्हें केवल ऑनलाइन माध्यम से ही भरा जाएगा। इसके लिए पुलिस पदाधिकारियों को उच्चतर प्रशिक्षण विद्यालय और सी-डैक (C-DAC) के माध्यम से विभिन्न जिलों में लगातार भौतिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कुलदीप भारद्वाज की रिपोर्ट