Patna traffic Police: डीजीपी का फरमान बनाम मैडम का टशन, पुलिस मुख्यालय के हुक्म पर भारी पड़ रहा ट्रैफिक SP रीडर का सिविल लिबास

Patna traffic Police: वर्दी को लेकर बिहार पुलिस महकमे के लिए फरमानों की पूरी फाइल है।जब बात साहब के दफ्तर में बैठने वाली खास शख्सियतों की आती है, तो पुलिस मैनुअल के तमाम पन्ने खुद-ब-खुद अलमारी में दफन हो जाते हैं।मैडम रीडर के अपने ही अलग कायदे हैं

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पुलिस मुख्यालय के हुक्म पर भारी पड़ रहा ट्रैफिक SP रीडर का सिविल लिबास- फोटो : reporter

Patna traffic Police:  वर्दी को लेकर बिहार पुलिस महकमे के लिए फरमानों और हिदायतों की पूरी फाइल है। गृह विभाग से लेकर पुलिस मुख्यालय तक से एक के बाद एक कड़े आदेश जारी हो चुके  हैं ताकि पुलिस की साख, अनुशासन और पुलिस  का इकबाल बुलंद रहे। लेकिन जनाब! कायदे-कानून तो शायद सिर्फ आम सिपाहियों और छोटे मुलाजिमों के लिए बनते हैं। जब बात साहब के दफ्तर में बैठने वाली खास शख्सियतों की आती है, तो पुलिस मैनुअल के तमाम पन्ने खुद-ब-खुद अलमारी में दफन हो जाते हैं। ताजा नज़ारा पटना ट्रैफिक एसपी के दफ्तर का है, जहाँ मैडम रीडर के अपने ही अलग कायदे-कानून चल रही हैं।

मुख्यालय का सख्त हुक्म और 'सिविल ड्रेस' का रुतबा

पुलिस मुख्यालय ने सूबे के तमाम पुलिस अफसरान और कर्मियों को साफ-साफ हिदायत दी है कि वे ड्यूटी के दौरान पुलिस मैनुअल के मुताबिक मुकम्मल वर्दी धारण करें। वर्दी की टोपी से लेकर बेल्ट तक पहनना लाजिमी कर दिया गया है। बिना टोपी के पाए जाने पर सीधी विभागीय कार्रवाई की ताकीद की गई है। यहाँ तक कि वर्दी पर नाम और ओहदा साफ-साफ दिखने वाला नेम प्लेट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

लेकिन ज़रा ठहरिए! पटना ट्रैफिक एसपी की रीडर पुष्पा कुमारी के लिए ये तमाम सरकारी फरमान शायद बेमानी हैं। मैडम दफ्तर में बिना किसी वर्दी के, बिल्कुल सिविल ड्रेस में अपनी हनक के साथ तशरीफ लाती हैं। अब सवाल यह पैदा होता है कि जब मैडम ने वर्दी पहनी ही नहीं, तो उस पर नेम प्लेट लगाने का सवाल ही कहाँ उठता है? जब दफ्तर की नींव ही बिना वर्दी के टिकी हो, तो गृह विभाग की नसीहतों का वजन वैसे ही हल्का हो जाता है।

नागरिकों और सिपाहियों की दुविधा: कौन दरोगा, कौन होमगार्ड?

बाहर से ट्रैफिक ड्यूटी करके जब थके-हारे सिपाही या फरियादी दफ्तर पहुँचते हैं, तो उनके सामने एक बड़ा अजीब असमंजस खड़ा हो जाता है। दफ्तर के अंदर सिविल कपड़ों में टहल रहे लोगों को देखकर यह पहचानना दुश्वार हो जाता है कि कौन साहिब हैं, कौन दरोगा, कौन एएसआई और कौन होमगार्ड का जवान और कौन साहब की रीडर।इस सिविलिया कल्चर के चलते दफ्तर का पेशेवर माहौल और अनुशासन तो तार-तार होता ही है, साथ ही बाहर से आने वाले फरियादियों के लिए भी यह समझना मुश्किल हो जाता है कि अपनी शिकायत लेकर किस अफसर के पास जाएं।

गृह विभाग ने महिला पुलिसकर्मियों के लिए भी एक विशेष गाइडलाइन जारी की थी कि ड्यूटी के दौरान अत्यधिक सज-धज कर आने से परहेज करें ताकि महकमे का पेशेवर आचरण कायम रहे। मगर जब आला अधिकारियों के नाक के नीचे ही एसपी दफ्तर की रीडर बिना वर्दी के पूरे टशन में ड्यूटी बजा रही हों, तो यह साफ जाहिर होता है कि नियम बनाने वाले और उनका अनुपालन कराने वाले दो अलग-अलग ध्रुव हैं।

जब ट्रैफिक एसपी कार्यालय के भीतर रीडर मैडम की यह स्थिति है, तो दूर-दराज के थानों और चौकियों पर खाकी के इस अनुशासन का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है।