विश्वास मत से पहले सियासी गर्मी, सीएम सम्राट चौधरी का महिला आरक्षण पर विपक्ष पर निशाना,गरमाई बिहार की राजनीति

Bihar Politics: पटना स्थित अटल सभागार, भाजपा मुख्यालय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रेस वार्ता ने बिहार की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। ..

Bihar Political Heat Rises Ahead of Trust Vote CM Targets Op
देवघर दौरे से पहले CM का बड़ा बयान- फोटो : social Media

Bihar Politics: पटना  स्थित अटल सभागार, भाजपा मुख्यालय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रेस वार्ता ने बिहार की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। नारी शक्ति और आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए साफ कहा कि महिलाओं के हक का खुला अपमान हुआ है और विपक्षी दलों ने मिलकर उनके साथ सियासी धोखा किया है।सीएम ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, जबकि नरेंद्र मोदी देश की महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा-बताइए, एक आम और साधारण महिला आखिर कब संसद तक पहुंचेगी?

सम्राट चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोकतंत्र के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और समाजवादी पार्टी जैसे दल इस नारे के डेल पर “खुशी मना रहे”थे।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अपने घर की बेटी को सांसद बनाना मंजूर है, लेकिन गरीब घर की बेटियों को संसद तक पहुंचने से रोकना इनकी सियासत का असली चेहरा है।”

सीएम ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके परिवार की महिलाएं चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन देश की आम बहनों को बराबरी का मौका देने से ये लोग कतराते हैं। वहीं लालू यादव पर हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी वे ऐसे विधेयकों का विरोध करते रहे हैं।राहुल गांधी की बहन सांसद बन सकती हैं लेकिन यूपी से एक तिहाई सीट पर बहनें चुनाव जीत कर जाए यह कांग्रेस नहीं मान सकती है। समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव की पत्नी चुनाव जीत सकती हैं लेकिन वहां से 40 सांसद हमारी बहनें बन जाए ऐसा होने से इन लोगों ने रोक रखा है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर यह विधेयक पास हो जाता, तो बिहार में महिला प्रतिनिधित्व की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती। अभी जहां सिर्फ 29 महिला विधायक और 4 महिला सांसद हैं, वहीं यह संख्या बढ़कर 122 विधायक और 20 सांसद तक पहुंच सकती थी।

इस मुद्दे को लेकर भाजपा अब देशव्यापी अभियान चलाने की तैयारी में है, जिसमें विपक्षी दलों से जवाब मांगा जाएगा। सीएम ने साफ कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कानून की नहीं, बल्कि “हक़, बराबरी और सम्मान” की जंग है।

सम्राट चौधरी ने खास तौर पर लालू प्रसाद यादव  की पार्टी पर निशाना साधते हुए उसे पहले से ही आरक्षण विरोधी करार दिया और कहा कि यह लड़ाई सिर्फ सियासत की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और उनके हक की है।इसी सियासी तपिश के बीच मुख्यमंत्री अपने पारिवारिक कार्यक्रम के तहत देवघर रवाना होने वाले हैं, जहां वे बाबा धाम में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

वहीं दूसरी ओर, 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जो सियासी लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री विश्वास मत प्रस्ताव पेश कर अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे।

 बिहार की राजनीति इस वक्त नारी आरक्षण बनाम विपक्ष की बहस में उलझ चुकी है, जहाँ बयानबाज़ी, आरोप-प्रत्यारोप और शक्ति प्रदर्शन तीनों अपने चरम पर हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह सियासी जंग सिर्फ शब्दों तक सीमित रहती है या सत्ता के समीकरण भी बदल देती है।