Bihar Politics:नीतीश का इस्तीफा या सियासी मास्टरस्ट्रोक? सियासत की शतरंज में नीतीश की इस चाल से एनडीए में हलचल, कुर्सी पर कौन करेगा कब्ज़ा?

Bihar Politics: बिहार की सियासत इन दिनों नई दास्तान लिख रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विधान परिषद से इस्तीफा सियासी शतरंज की बिसात पर चली गई एक अहम चाल मानी जा रही है।

 Bihar Political Twist Nitish Resigns
सियासत की शतरंज में नई चाल!- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत इन दिनों उबाल पर है और सत्ता के गलियारों में हलचल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधान परिषद  से दिए गए इस्तीफे को सभापति अवधेश नारायण सिंह ने मंजूरी दे दी है। इस एक फैसले ने सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है और अब हर तरफ बस एक ही चर्चा सीएम की कुर्सी किसके हाथ जाएगी?

नीतीश कुमार, जिन्हें सियासत का मंझा हुआ खिलाड़ी और हार्ड बारगेनर माना जाता है, उन्होंने एक बार फिर ऐसा दांव चला है, जिसने NDA के भीतर नए समीकरणों की बिसात बिछा दी है। जेडीयू और बीजेपी के रिश्तों में अब नई परिभाषा लिखी जा रही है। अभी तक सत्ता की कमान जेडीयू के हाथ में थी, मगर अब दिल्ली की सियासत की तरफ बढ़ते कदमों ने पटना की गद्दी को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है।

हालांकि, जेडीयू के खेमे से साफ पैगाम दिया जा रहा है कि नीतीश कहीं नहीं जा रहे और सरकार उनके मार्गदर्शन में ही चलेगी। एमएलसी नीरज कुमार का बयान भी इसी ओर इशारा करता है कि असली ताकत अब भी नीतीश के हाथ में ही है। लेकिन सियासी जानकार इसे स्ट्रैटेजिक साइलेंस और पावर मैनेजमेंट की चाल मान रहे हैं।

इस्तीफे से पहले मुख्यमंत्री आवास पर जिस तरह से सीनियर नेताओं ललन सिंह, संजय कुमार झा, विजय चौधरी और अशोक चौधरी की आवाजाही बढ़ी, उसने यह साफ कर दिया कि अंदरखाने कोई बड़ा खाका तैयार हो रहा है। कार्यकारी मुख्यमंत्री का फॉर्मूला भी अब चर्चा के केंद्र में है, जो इस सियासी पहेली का अस्थायी हल हो सकता है।

उधर बीजेपी भी फिलहाल वेट एंड वॉच की नीति पर चल रही है। देश के कई राज्यों में चुनावी माहौल के बीच पार्टी कोई बड़ा जोखिम उठाने के मूड में नहीं दिख रही।

वैसे भी मार्च का महीना नीतीश कुमार के लिए हमेशा खास रहा है जन्म से लेकर सत्ता तक का सफर इसी महीने से जुड़ा रहा है। और अब इसी मार्च में एक और बड़ा फैसला, जो बिहार की सियासत की दिशा बदल सकता है।

अब सवाल वही क्या यह सिर्फ इस्तीफा है या किसी बड़े सियासी खेल की शुरुआत?