Bihar Rajya Sabha Election 2026:बिहार राज्यसभा का सियासी संग्राम! चार सीटें तय, पांचवीं पर फंसा पेच- इन छह विधायकों के इशारे पर तय होगी जीत-हार

Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार की सियासत इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर जबरदस्त सरगर्मी और सस्पेंस से भरी हुई है।...

Bihar Rajya Sabha Battle 5th Seat Hinges on Six MLAs
राज्यसभा का सियासी संग्राम! चार सीटें तय, पांचवीं पर फंसा पेच- फोटो : social Media

Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार की सियासत इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर जबरदस्त सरगर्मी और सस्पेंस से भरी हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन, जदयू के वरिष्ठ नेता रामनाथ ठाकुर और दलित नेता शिवेश कुमार राम ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इन चारों नेताओं के निर्विरोध निर्वाचन को लेकर सियासी गलियारों में लगभग कोई शक नहीं है। लेकिन असली पेच और दिलचस्पी पांचवीं सीट पर आकर फंस गई है, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा की राह आसान नहीं दिख रही।

असल में विधानसभा के गणित ने इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। भाजपा और जदयू के पास मौजूद विधायकों का संख्याबल चार उम्मीदवारों के निर्वाचन में लगभग पूरी तरह खर्च हो जाएगा। ऐसे में अगर एनडीए को उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजना है, तो उसे कम से कम तीन बाहरी विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह को जीत के लिए पूरे छह अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे।

यही वजह है कि बिहार की राजनीति में इस वक्त छह विधायकों की अहमियत अचानक बहुत बढ़ गई है। दिलचस्प बात यह है कि ये विधायक फिलहाल किसी भी बड़े गठबंधन न तो एनडीए और न ही महागठबंधन के पाले में पूरी तरह खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा की पांचवीं सीट की चाबी अब इन्हीं के हाथ में मानी जा रही है।

इन विधायकों में सबसे प्रमुख नाम अख्तरुल ईमान का है, जो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष भी हैं और पूर्णिया जिले की अमौर सीट से विधायक हैं। इसके अलावा मुर्शीद आलम (जोकीहाट), मो. तौसीफ आलम (बहादुरगंज), सरवर आलम और गुलाम सरवर जैसे AIMIM के विधायक भी इस सियासी समीकरण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।इसी कतार में एक और अहम नाम है सतीश कुमार यादव का, जो मायावती की पार्टी बसपा के बिहार में इकलौते विधायक हैं और कैमूर के चैनपुर से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में इस वक्त पांचवीं राज्यसभा सीट को लेकर सियासी शतरंज बिछ चुकी है। अब सबकी निगाहें इन्हीं छह विधायकों पर टिकी हैं क्योंकि उनकी एक चाल तय करेगी कि दिल्ली के सदन में इस बार एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा पहुंचेंगे या महागठबंधन के अमरेंद्रधारी सिंह। बिहार की सियासत में फिलहाल यही सबसे बड़ा सवाल बन चुका है।