Bihar Schools: बिहार के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों से पहले हेडमास्टर चखेंगे मिड-डे मील, शिक्षा विभाग का सख्त आदेश

Bihar Schools: बिहार के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और खानपान को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। ....

Mid Day Meal
अब भोजन की गुणवत्ता पर रहेगी सीधी निगरानी- फोटो : X

Bihar Schools: बिहार के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और खानपान को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। अब स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) परोसने से पहले प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक को खुद भोजन चखना होगा। भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक होने और बच्चों के खाने योग्य पाए जाने के बाद ही उसे विद्यार्थियों को परोसा जा सकेगा।इस संबंध में मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय ने शुक्रवार को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को आधिकारिक पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था का मकसद भोजन की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाना और बच्चों को सुरक्षित एवं पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना है।

बच्चों को खाना देने से पहले हेडमास्टर करेंगे टेस्ट

शिक्षा विभाग के निर्देश के मुताबिक, प्रत्येक दिन मध्याह्न भोजन परोसने से पहले विद्यालय के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक या प्रभारी प्रधान शिक्षक को भोजन चखना अनिवार्य होगा। संबंधित शिक्षक को खुद भोजन ग्रहण कर उसकी गुणवत्ता, स्वाद और खाने योग्य होने की जांच करनी होगी।यदि विद्यालय में प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक मौजूद नहीं हैं तो उनके द्वारा नामित शिक्षक यह जिम्मेदारी निभाएंगे। यानी किसी भी परिस्थिति में भोजन की जांच किए बिना बच्चों को खाना परोसने की अनुमति नहीं होगी।

भोजन चखने के बाद देना होगा प्रमाण-पत्र

विभाग ने केवल भोजन चखने का निर्देश ही नहीं दिया है, बल्कि इसकी लिखित पुष्टि करना भी जरूरी कर दिया है। भोजन ग्रहण करने के बाद संबंधित शिक्षक को प्रमाण-पत्र देना होगा कि उन्होंने स्वयं भोजन चखा है और उसकी गुणवत्ता अच्छी है।प्रमाण-पत्र में यह भी स्पष्ट करना होगा कि भोजन बच्चों को परोसने और उनके खाने के योग्य है। इस दस्तावेज पर संबंधित प्रधानाध्यापक या प्रभारी शिक्षक के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।सबसे अहम बात यह है कि भोजन की गुणवत्ता से संबंधित प्रमाण-पत्र को विद्यालय के अभिलेख में सुरक्षित रखना होगा। जरूरत पड़ने पर विभागीय अधिकारी इसकी जांच कर सकेंगे।

भोजन की गुणवत्ता को लेकर मिली थीं शिकायतें

मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि केंद्रीयकृत रसोईघरों और विद्यालय शिक्षा समितियों द्वारा सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं परोसा जा रहा है।इन शिकायतों और सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है। सरकार का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला भोजन सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। इसके लिए जिम्मेदार शिक्षकों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।

अब भोजन की गुणवत्ता पर रहेगी सीधी निगरानी

नई व्यवस्था लागू होने के बाद मध्याह्न भोजन वितरण की प्रक्रिया में प्रधानाध्यापकों और नामित शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। उन्हें रोजाना भोजन चखने के साथ उसकी गुणवत्ता का प्रमाण भी देना होगा।इस फैसले से स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर निगरानी व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही, यदि कहीं निर्धारित मानकों की अनदेखी होती है तो विद्यालय स्तर पर इसकी जानकारी और जवाबदेही तय करने में भी आसानी होगी।बिहार सरकार की इस पहल का सीधा मकसद है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिले तथा मध्याह्न भोजन योजना का लाभ बिना किसी लापरवाही के विद्यार्थियों तक पहुंचे।