Bihar professor: चूहों से छुटकारा अब बिना जहर! बिहार के वैज्ञानिक की चमत्कारी डिवाइस को मिला इंग्लैंड का पेटेंट

Bihar professor: बिहार के वैज्ञानिक प्रो. मनेंद्र कुमार ने चूहों को बिना मारे भगाने की पॉइजन-फ्री डिवाइस बनाई है, जिसे इंग्लैंड का पेटेंट मिला है। जानिए कैसे काम करती है यह डिवाइस और कितनी होगी कीमत।

Bihar professor
चूहा भगाने का नया तरीका- फोटो : social media

Bihar professor: अगर आपके घर, दुकान या गोदाम में चूहों की वजह से परेशानी बढ़ गई है, तो अब उन्हें मारने या ज़हर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिहार के एक वैज्ञानिक ने चूहों को बिना नुकसान पहुंचाए भगाने वाली एक खास डिवाइस विकसित की है, जिसे यूनाइटेड किंगडम यानी इंग्लैंड से पेटेंट मिल चुका है। अब इस पॉइजन-फ्री और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है।

बिहार के प्रोफेसर का अनोखा आविष्कार

इस अनोखी डिवाइस का आविष्कार बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी के साइंस डिपार्टमेंट के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनेंद्र कुमार ने किया है। उनका कहना है कि भारत में चूहे खेती, घरों और गोदामों में भारी नुकसान पहुंचाते हैं। आमतौर पर लोग ज़हर या ट्रैप का इस्तेमाल करते हैं, जो पर्यावरण और इंसानों दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसी समस्या का सुरक्षित समाधान खोजने के उद्देश्य से उन्होंने यह तकनीक विकसित की।

इंग्लैंड से मिला पेटेंट, 24 जनवरी को मंजूरी

प्रोफेसर मनेंद्र कुमार के अनुसार उनकी इस तकनीक का नाम “Ultrasonic and Scent-Based Rodent Deterrent” है। इसे यूनाइटेड किंगडम में पेटेंट प्रदान किया गया है। 24 जनवरी को पेटेंट को मंजूरी मिली और इसके दो दिन बाद आधिकारिक पेटेंट सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। यह उपलब्धि बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में बड़ी सफलता मानी जा रही है।

अल्ट्रासोनिक साउंड से चूहों को भगाती है डिवाइस

यह डिवाइस अल्ट्रासोनिक साउंड टेक्नोलॉजी पर काम करती है। इसमें 20,000 से 60,000 हर्ट्ज़ की ऐसी ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो इंसानों को सुनाई नहीं देतीं, लेकिन चूहों के लिए बेहद परेशान करने वाली होती हैं। चूहे इन उच्च फ्रीक्वेंसी वाली आवाजों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं, जिसके कारण वे उस जगह को छोड़कर भाग जाते हैं।

खुशबू से भी होता है असर

इस डिवाइस की खास बात यह है कि यह सिर्फ आवाज ही नहीं, बल्कि गंध के जरिए भी चूहों को दूर भगाती है। इसमें पेपरमिंट और सिट्रोनेला जैसे एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल किया गया है, जो एक कार्ट्रिज सिस्टम के जरिए बहुत कम मात्रा में निकलता है। यह खुशबू इंसानों के लिए सुरक्षित होती है, लेकिन चूहों को बिल्कुल पसंद नहीं आती। सुनने और सूंघने, दोनों इंद्रियों पर एक साथ असर होने से चूहों के लिए उस इलाके में रहना मुश्किल हो जाता है।

20 से 30 फीट तक असरदार तकनीक

प्रोफेसर मनेंद्र कुमार के अनुसार यह डिवाइस 20 से 30 फीट के दायरे में प्रभावी है। इसमें पीआईआर यानी पैसिव इंफ्रारेड मोशन सेंसर लगाया गया है, जो चूहों की गतिविधि को पहचानता है। माइक्रोकंट्रोलर इस गतिविधि के अनुसार अल्ट्रासोनिक साउंड और खुशबू को नियंत्रित करता है। साथ ही, साउंड का पैटर्न लगातार बदलता रहता है ताकि चूहे उसकी आदत न डाल सकें।

बैटरी और सोलर से चलेगी, ग्रामीण इलाकों के लिए उपयोगी

यह डिवाइस कम बिजली की खपत को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। इसे बैटरी या सोलर एनर्जी दोनों से चलाया जा सकता है। इसी वजह से यह ग्रामीण इलाकों और उन जगहों के लिए भी उपयोगी होगी, जहां बिजली की सुविधा सीमित है।

कीमत और बाजार में उपलब्धता

प्रोफेसर मनेंद्र कुमार का कहना है कि इस डिवाइस की अनुमानित कीमत करीब एक हजार रुपये रखी जाएगी, ताकि आम लोग, किसान, गोदाम और वेयरहाउस संचालक इसे आसानी से खरीद सकें। यूके से पेटेंट मिलने के बाद अब अगला लक्ष्य इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करना है, ताकि यह डिवाइस जल्द से जल्द बाजार में उपलब्ध हो सके।