Bihar land survey: बिहार में टोपोलैण्ड और असर्वेक्षित भूमि के सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज, विजय सिन्हा ने बुलाई हाई लेबल मीटिंग, हर जिले से मांगी गई सूची

Bihar land survey:बिहार में अवस्थित टोपोलैण्ड अथवा असर्वेक्षित भूमि के सर्वेक्षण और उसके प्रकृति निर्धारण की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है।...

Bihar speeds survey of topo unsurveyed land list sought from
टोपोलैंड का होगा सर्वेक्षण- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar land survey:बिहार की सियासत में अब जमीन का खेल नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। बरसों से अंधेरे में दबी टोपोलैंड और असर्वेक्षित जमीनों को लेकर हुकूमत ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कर दिया है कि अब राज्य की एक-एक इंच जमीन का हिसाब-किताब होगा, ताकि जमीन से जुड़े विवादों और गड़बड़झाले पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सके।

सरकार ने टोपोलैंड यानी ऐसी जमीनें, जिनका अब तक विधिवत सर्वेक्षण नहीं हुआ या जिनकी स्थिति राजस्व रिकॉर्ड में साफ नहीं है, उनके व्यापक सर्वेक्षण का बिगुल बजा दिया है। इसके साथ ही बकास्त भूमि और अन्य असर्वेक्षित जमीनों की भी पहचान सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों से डिटेल तलब किया गया है। यह कदम महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जमीन के सियासी गणित को साधने की बड़ी कवायद माना जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव को सख्त निर्देश दिए हैं कि हर जिले में ऐसी जमीनों की गहन समीक्षा की जाए। इसी कड़ी में 10 अप्रैल 2026 को एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई गई है, जिसमें पूरे राज्य की जमीनों का पोस्टमार्टम किया जाएगा और आगे की रणनीति तय होगी।

हुकूमत का दावा है कि इस पहल का मकसद नियम-कानून को ज्यादा पारदर्शी, व्यवहारिक और विवादरहित बनाना है। इसके लिए विभाग ने सभी समाहर्ताओं को पत्र भेजकर कहा है कि वे अपने-अपने जिलों में टोपोलैंड और असर्वेक्षित जमीनों की पहचान कर निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट जल्द सौंपें। यह काम औपचारिकता नहीं, बल्कि प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का फरमान जारी हुआ है।

दरअसल, राज्य में कई ऐसी जमीनें हैं जिनकी न तो सही एंट्री है और न ही स्पष्ट मालिकाना स्थिति। यही वजह है कि इन जमीनों पर अक्सर विवाद, कब्जा और सियासी तनातनी देखने को मिलती रही है। अब सरकार इन सभी धुंधले रिकॉर्ड को साफ कर एक पारदर्शी भूमि प्रबंधन प्रणाली खड़ी करना चाहती है। सबसे ज्यादा मामला सारण जिले का है।

अगर यह अभियान अपने मकसद में कामयाब होता है, तो न सिर्फ जमीन विवादों का समाधान आसान होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने में भी तेजी आएगी। साफ है, बिहार में अब जमीन का खेल अनदेखा नहीं रहेगा हर टुकड़े का सच सामने लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

रिपोर्ट- हीरेश