अब जिला अस्पतालों में होंगे जटिल हड्डी ऑपरेशन, 16 हाईटेक मशीनों से लैस होंगे ऑर्थो ओटी, मेडिकल कॉलेजों पर घटेगा मरीजों का बोझ

Bihar health: बिहार में हड्डी रोग के मरीजों के लिए बड़ी राहत की तैयारी शुरू हो गई है। ...

Bihar to Upgrade Orthopedic OTs in All District Hospitals
जिला अस्पतालों में होंगे जटिल हड्डी ऑपरेशन- फोटो : social Media

Bihar health: बिहार में हड्डी रोग के मरीजों के लिए बड़ी राहत की तैयारी शुरू हो गई है। अब फ्रैक्चर, जोड़ प्रत्यारोपण और सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को इलाज के लिए बड़े मेडिकल कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिला अस्पतालों के ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर (ऑर्थो ओटी) को भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुरूप आधुनिक बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे जिला स्तर पर ही जटिल हड्डी संबंधी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (2025-30) की कार्यक्रम क्रियान्वयन योजना के तहत की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) को आवश्यक आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उपकरणों की आपूर्ति से पहले सभी जिला अस्पतालों के ऑर्थो ओटी का गैप एनालिसिस कराया जाएगा, ताकि जहां जिन मशीनों की कमी है, उनकी सूची तैयार कर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रत्येक जिला अस्पताल के ऑर्थो ओटी को 16 प्रकार के अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इनमें ऑर्थोपेडिक अटैचमेंट वाली ओटी टेबल, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, सी-आर्म मशीन, आर्थ्रोस्कोपी सिस्टम, इलेक्ट्रिकल सक्शन मशीन, ऑटोक्लेव, 12-चैनल ईसीजी मशीन, इन्फ्यूजन पंप, क्रैश कार्ट, मरीज ट्रॉली और आईवी स्टैंड सहित कई जरूरी उपकरण शामिल हैं। इन मशीनों की मदद से जटिल फ्रैक्चर, जोड़ प्रत्यारोपण, खेल के दौरान लगी गंभीर चोटों और सड़क हादसों के मामलों में अधिक सुरक्षित और प्रभावी सर्जरी संभव होगी।

राज्य स्वास्थ्य समिति ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी उपकरणों का इंस्टॉलेशन, परीक्षण, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि और ई-उपकरण (EMMS) पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाए। हर मशीन को एक विशिष्ट एसेट आईडी दी जाएगी, जिससे उसकी कार्यशील स्थिति की नियमित निगरानी की जा सके। साथ ही डॉक्टरों और तकनीकी कर्मियों को इन आधुनिक उपकरणों के संचालन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।इस पहल से जिला अस्पतालों की उपचार क्षमता बढ़ेगी, मरीजों को अपने जिले में ही बेहतर इलाज मिलेगा और बड़े मेडिकल कॉलेजों पर रेफरल का दबाव भी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।