बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 5 गुना बढ़ी, 9,426 मेगावाट बिजली आपूर्ति बना नया रिकॉर्ड
ऊर्जा विभाग के अनुसार, एनडीए सरकार के सत्ता संभालने के समय वर्ष 2005 में बिहार को केवल 700 मेगावाट बिजली उपलब्ध होती थी। इसके मुकाबले 4 जुलाई 2026 को राज्य में 9,426 मेगावाट बिजली की रिकॉर्ड आपूर्ति दर्ज की गई।
Bihar Electricity : कभी बिजली संकट के लिए पहचान रखने वाला बिहार आज बिजली आपूर्ति और खपत के मामले में नया इतिहास रच रहा है। ऊर्जा विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली खपत में 5.3 गुना की वृद्धि हुई है। वर्ष 2005 में जहां प्रति व्यक्ति वार्षिक बिजली खपत महज 75 यूनिट थी, वहीं वर्ष 2026 में यह बढ़कर 401 यूनिट पहुंच गई है। इसी अवधि में राज्य ने 9,426 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति का नया आंकड़ा भी हासिल किया है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, एनडीए सरकार के सत्ता संभालने के समय वर्ष 2005 में बिहार को केवल 700 मेगावाट बिजली उपलब्ध होती थी। इसके मुकाबले 4 जुलाई 2026 को राज्य में 9,426 मेगावाट बिजली की रिकॉर्ड आपूर्ति दर्ज की गई। इससे पहले वर्ष 2025 में अधिकतम 8,822 मेगावाट बिजली आपूर्ति हुई थी, जबकि 2012 में यह आंकड़ा केवल 1,751 मेगावाट था। विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों और घरों तक बिजली पहुंचने, तेजी से हो रहे शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के कारण बिजली की खपत में लगातार वृद्धि हुई है।
हर गांव तक पहुंची बिजली, आपूर्ति भी बेहतर
राज्य सरकार ने अक्टूबर 2018 में 'हर घर बिजली' योजना के तहत सभी गांवों और घरों के विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया था। वर्तमान में बिहार के सभी 39,073 गांव विद्युतीकृत हैं। वर्ष 2005 में यह संख्या केवल 14,020 थी, जबकि 2012 में 33,850 गांवों तक बिजली पहुंची थी। बिजली आपूर्ति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। फिलहाल शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन 23 से 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 23 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। वर्ष 2005 में शहरों में केवल 10 से 12 घंटे तथा गांवों में 5 से 6 घंटे बिजली मिलती थी।
2.22 करोड़ उपभोक्ता, 90 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर
राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2005 में जहां केवल 17.30 लाख उपभोक्ता थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 2.22 करोड़ हो गया है। इनमें करीब 90 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। राजधानी पटना ने भी बिजली खपत का नया रिकॉर्ड बनाया है। 21 जून 2026 को पटना में 933 मेगावाट बिजली आपूर्ति दर्ज की गई। वर्ष 2005 में यह आंकड़ा करीब 400 मेगावाट था, जबकि 2015 में लगभग 550 मेगावाट तक पहुंचा था।
125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का लाभ
बिजली की बेहतर उपलब्धता को देखते हुए राज्य सरकार ने जुलाई 2025 से 1.86 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना लागू की है। ऊर्जा विभाग का कहना है कि बढ़ती मांग को देखते हुए दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को और मजबूत किया है।
बिजली ढांचे का हुआ व्यापक विस्तार
पिछले 20 वर्षों में बिजली अवसंरचना का भी तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2005 में राज्य में केवल 45 ग्रिड सब-स्टेशन (GSS) थे, जिनकी संख्या बढ़कर 175 हो गई है। इसी तरह पावर सब-स्टेशनों (PSS) की संख्या 368 से बढ़कर 1,283 पहुंच गई है। वहीं वितरण ट्रांसफॉर्मरों की संख्या बढ़कर 3.80 लाख से अधिक हो गई है। इसके साथ ही राज्यभर में ट्रांसमिशन लाइनों का भी बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है।
बिजली क्षेत्र में नई तस्वीर
ऊर्जा विभाग का दावा है कि बेहतर बिजली आपूर्ति, व्यापक विद्युतीकरण, स्मार्ट मीटर, मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या ने बिहार के बिजली क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। आने वाले वर्षों में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए विभाग ने अतिरिक्त तैयारियां भी शुरू कर दी हैं, ताकि राज्य में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।