BJP की नई टीम में एक तीर, कई निशाने, इस राज्य का दबदबा, छात्र आंदोलनों की भेट चढ़े आईटी सेल के अमित मालवीय

BJP national team: भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल के तौर पर देखना शायद तस्वीर का अधूरा हिस्सा होगा।..

BJP New Team UP Focus Youth Push and Big IT Cell Shake Up
BJP की नई टीम में एक तीर, कई निशाने- फोटो : social Media

BJP national team: भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल के तौर पर देखना शायद तस्वीर का अधूरा हिस्सा होगा। नए बदलावों में पार्टी ने एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश के नेताओं को बढ़ी हुई तवज्जो, अपेक्षाकृत युवा चेहरों को आगे लाना और करीब एक दशक बाद आईटी सेल के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव इन तीनों फैसलों में भाजपा की आने वाले चुनावों और बदलते राजनीतिक माहौल को लेकर रणनीति साफ नजर आती है। सबसे दिलचस्प बदलाव आईटी सेल में हुआ है। जेन जी आंदोलने की भेंट अमित मालवीय चढ़ गए। करीब दस साल तक इस अहम जिम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के की एंट्री को पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कैमिस्ट्री के प्रोफेसर रहे म्हस्के चुनावी आंकड़ों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़े डेटा विश्लेषण अभियानों में काम कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ आईटी सेल के समन्वयक के तौर पर उन्होंने सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और विभिन्न क्षेत्रों में व्हाट्सऐप नेटवर्क तैयार करने पर भी काम किया है।हालिया छात्र आंदोलनों ने राजनीतिक दलों को एक बार फिर यह एहसास कराया है कि सोशल मीडिया अब सिर्फ चुनावी प्रचार का औजार नहीं रह गया है। छोटे वीडियो, मीम, व्यंग्य और वायरल कंटेंट किसी मुद्दे को चंद घंटों में व्यापक जनचर्चा में ला सकते हैं। लिहाजा भाजपा अब महज ‘वार-प्रतिवार’ की डिजिटल रणनीति से आगे बढ़कर क्षेत्र, आयु वर्ग और मुद्दों के आधार पर जनता के मूड को समझने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।नई नियुक्तियों में डेटा और डिजिटल नेटवर्किंग का मेल इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। पार्टी के सामने चुनौती सिर्फ अपने संदेश को लोगों तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि बदलती राजनीतिक भाषा और नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं को समझने की भी है।

नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश का प्रभाव साफ दिखाई देता है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने प्रदेश से कई नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी हैं। राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में स्मृति ईरानी की वापसी सबसे ज्यादा चर्चा में है। अमेठी से चुनाव हारने के बाद उन्हें राजनीतिक तौर पर अपेक्षाकृत पीछे माना जा रहा था, लेकिन नई जिम्मेदारी ने एक बार फिर उन्हें संगठन की केंद्रीय धुरी में ला दिया है।सामाजिक समीकरण साधने की कवायद भी स्पष्ट है। कुर्मी समाज से आने वाली रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। बुलंदशहर के सांसद डॉ. भोला सिंह को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली है। आजमगढ़ की संगीता यादव के जरिए यादव समाज तक राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है।

उत्तर प्रदेश से अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चे का अध्यक्ष और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान दिया जाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यानी संगठन के भीतर पदों का बंटवारा सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और चुनावी समीकरणों का संदेश भी दे रहा है।भारतीय राजनीति में उत्तर प्रदेश का महत्व किसी से छिपा नहीं है। लोकसभा में सबसे ज्यादा सीटों वाला यह राज्य केंद्र की सत्ता की राह में निर्णायक भूमिका निभाता है। यही कारण है कि भाजपा के लिए आगामी विधानसभा चुनाव केवल एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक शक्ति, सामाजिक समीकरण और सत्ता की स्वीकार्यता की परीक्षा भी होगा।नई टीम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने चुनाव से पहले अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने का संकेत दिया है।

भाजपा ने सिर्फ नए चेहरों पर दांव नहीं लगाया है। संघ से जुड़े रहे राम माधव, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और बैजयंत जय पांडा जैसे अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण भूमिका मिली है। यानी पार्टी का फार्मूला साफ हैअनुभव को बनाए रखते हुए नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना।युवा मोर्चे के अध्यक्ष पद के लिए हेमांग जोशी के नाम की चर्चा भी इसी दिशा में संकेत करती है। वहीं पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी, संबित पात्रा को नॉर्थ ईस्ट कॉर्डिनेशन और अनिल बलूनी को मीडिया संयोजन की जिम्मेदारी दी गई है।महिलाओं को भी नई टीम में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। राष्ट्रीय पदाधिकारियों में कुल 12 महिलाओं को शामिल किए जाने और छत्तीसगढ़ की रूप चौधरी को महिला मोर्चे की जिम्मेदारी दिए जाने से पार्टी ने महिला नेतृत्व को भी संगठनात्मक प्राथमिकता में रखा है।

कुल मिलाकर भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम को देखें तो तस्वीर में तीन बड़े संदेश उभरते हैं UP के लिए चुनावी तैयारी, डिजिटल राजनीति के बदलते मिजाज की समझ और नई पीढ़ी के साथ संगठनात्मक तालमेल। अब असली परीक्षा यह होगी कि ये बदलाव कागज पर किए गए संगठनात्मक फेरबदल तक सीमित रहते हैं या जमीन पर पार्टी की राजनीतिक रणनीति को भी नया धार देते हैं।