BPSC AEDO Exam: BPSC AEDO परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा! 35 आरोपी गिरफ्तार, अब अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

BPSC AEDO exam: BPSC AEDO परीक्षा घोटाले में EOU जांच से बड़े खुलासे हुए हैं। 35 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं, बायोमेट्रिक एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी है और BPSC अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

BPSC AEDO exam
बिहार में BPSC AEDO परीक्षा घोटाला- फोटो : social media

BPSC AEDO exam: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की अप्रैल 2026 में रद्द की गई सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुईं और पूरी व्यवस्था पर कथित तौर पर परीक्षा माफिया का प्रभाव था। अब इस मामले में लगातार कार्रवाई की जा रही है।

जांच के दौरान पता चला कि बायोमेट्रिक सत्यापन का काम करने वाली एजेंसी ने तय नियमों का पालन नहीं किया। कर्मचारियों की नियुक्ति रेंडमाइजेशन प्रक्रिया के जरिए होनी थी, लेकिन आरोप है कि अंतिम समय में सूची से बाहर के लोगों को ड्यूटी पर लगा दिया गया। इससे पूरी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

EOU की जांच में क्या आया सामने

EOU की जांच में यह भी सामने आया कि जिन लोगों को बायोमेट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से कई खुद इसी एईडीओ परीक्षा के अभ्यर्थी थे। नियमों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी उम्मीदवार को ऐसी ड्यूटी नहीं दी जा सकती थी। इसके बावजूद उन्हें परीक्षा केंद्रों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई। जांच के बाद जयपुर की बायोमेट्रिक सत्यापन एजेंसी मेसर्स साईं एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी की गई है। इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे राज्य सरकार के साथ-साथ देश की अन्य परीक्षा एजेंसियों को भी भेजा गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

EOU के डीआईजी ने क्या कहा?

आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बताया कि मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा में दर्ज पांच मामलों की जांच के दौरान अब तक 35 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारी, सुपरवाइजर और जिला समन्वयक भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई हैं। जांच के दौरान एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई। बेगूसराय, छपरा और नालंदा में ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए अभ्यर्थियों को उत्तर उपलब्ध कराने के संकेत मिले हैं। ईओयू को यह भी शक है कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर जैमर को जानबूझकर प्रभावी तरीके से काम नहीं करने दिया गया। इस मामले में जैमर सेवा देने वाली कंपनी ईसीआईएल के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

EOU के जांच का दायरा बढ़ा

ईओयू के अनुसार, मुंगेर के सुजल कुमार और समीर कुमार पहले भी सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली के आरोपित रह चुके थे। इसके बावजूद उन्हें जिला समन्वयक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी गई। वहीं नालंदा के चंदन कुमार को पहले परीक्षा में कदाचार के कारण निष्कासित किया जा चुका था, लेकिन बाद में उन्हें भी ड्यूटी पर लगाया गया। अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। ईओयू बीपीएससी के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि परीक्षा संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी किन अधिकारियों के पास थी और किस स्तर पर लापरवाही हुई। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।