सरकारी भवनों की मरम्मति में लापरवाही पर सख्ती, अभियंताओं को एक सप्ताह का अल्टीमेटम

बिहार भवन निर्माण विभाग ने आवास मरम्मति पंजियों के संधारण की रिपोर्ट न देने पर अभियंताओं को स्मार पत्र जारी किया है। एक सप्ताह में रिपोर्ट अनिवार्य।

सरकारी भवनों की मरम्मति में लापरवाही पर सख्ती, अभियंताओं को

Patna -: बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने राज्य के सरकारी आवासों और कार्यालयों के रखरखाव में बरती जा रही शिथिलता पर कड़ा रुख अपनाया है । विभाग के संयुक्त सचिव शिव रंजन ने सभी अधीक्षण और कार्यपालक अभियंताओं को 'स्मार पत्र-1' जारी कर फटकार लगाई है । पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भवनों की मरम्मति से जुड़ी पंजियों का संधारण न करना प्रशासनिक लापरवाही है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा 

पंजियों के संधारण की अनिवार्यता और उद्देश्य

विभागीय आदेश के अनुसार, प्रत्येक प्रमंडल के अधीन आने वाले सभी आवासीय एवं गैर-आवासीय भवनों के लिए 'भवन पंजी' और 'आवास मरम्मति पंजी' तैयार करना अनिवार्य है । इन पंजियों का मुख्य उद्देश्य हर साल मरम्मति कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करना है । इसके माध्यम से ही विभाग यह तय करता है कि किस भवन को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है और किस पर कितना बजट खर्च किया जाना चाहिए 

बजट और आय-व्यय पर नियंत्रण में बाधा

विभाग ने चिंता जताते हुए कहा है कि पंजियों का संधारण न होने के कारण मरम्मति पर होने वाले वार्षिक व्यय पर नियंत्रण रखना कठिन हो रहा है । आंकड़ों के अभाव में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि पिछले वर्षों में किस आवास पर कितना खर्च हुआ है । इस अव्यवस्था के कारण सरकारी धन के सदुपयोग और निगरानी प्रणाली में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है, जिसे दूर करने के लिए डिजिटल या भौतिक पंजियों का अपडेट होना अनिवार्य है 

डेडलाइन खत्म होने के बाद भी नहीं भेजी गई रिपोर्ट

इससे पूर्व विभाग ने 8 जनवरी 2026 को पत्र भेजकर सभी प्रमंडलों से 15 जनवरी 2026 तक क्रियान्वयन प्रतिवेदन (Implementation Report) की मांग की थी । हालांकि, निर्धारित समय सीमा बीत जाने के ढाई महीने बाद भी कई अभियंताओं द्वारा यह रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है 。 विभाग ने इस देरी को गंभीरता से लेते हुए इसे कार्य के प्रति उदासीनता माना है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण की स्थिति पैदा कर दी है 

एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का अंतिम निर्देश

अब विभाग ने सभी संबंधित अधीक्षण एवं कार्यपालक अभियंताओं को अंतिम चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि पत्र प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से प्रतिवेदन उपलब्ध कराएं । संयुक्त सचिव ने इस मामले को "अत्यंत आवश्यक एवं महत्वपूर्ण" श्रेणी में रखा है । यदि इस बार भी रिपोर्ट नहीं सौंपी जाती है, तो दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्तियों के रखरखाव से जुड़ा मामला है