62 हजार करोड़ का हिसाब गायब! CAG रिपोर्ट ने खोली बिहार सरकार के खर्च की पोल, कागजों पर बने पुल, जमीन पर नहीं मिला फायदा,विपक्ष हुआ हमलावर

Bihar Audit Report:नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिहार सरकार द्वारा खर्च किए गए 62,632 करोड़ रुपये का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, हजारों करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक लंबित हैं।

CAG Flags 62632 Crore Unaccounted Spending in Bihar
CAG रिपोर्ट ने खोली बिहार सरकार के खर्च की पोल- फोटो : social Media

Bihar Audit Report:  बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक  की रिपोर्ट ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिहार सरकार द्वारा खर्च किए गए 62,632 करोड़ रुपये का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, हजारों करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक लंबित हैं।

वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा के पटल पर CAG रिपोर्ट रखी, जिसमें राज्य की विकास योजनाओं, बजट खर्च और वित्तीय अनुशासन को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3.64 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, लेकिन उसका करीब 21 प्रतिशत हिस्सा खर्च नहीं हो सका।

CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि 31 मार्च 2025 तक राज्य में 62,632 करोड़ रुपये के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया है। कुल मिलाकर 92,131 करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े UC लंबित पाए गए हैं। इनमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के ही करीब 39,228.57 करोड़ रुपये शामिल हैं।रिपोर्ट में विकास योजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अररिया और पूर्वी चंपारण में ऐसे दो पुलों का मामला सामने आया है, जिनके निर्माण का दावा कागजों पर किया गया। इन योजनाओं पर सरकार के करीब 3.30 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका।

CAG की इस टिप्पणी के बाद सरकारी योजनाओं की निगरानी और धन के सही इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष ने इसे वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा बनाया है।

जब सरकार किसी विभाग, एजेंसी या संस्था को किसी योजना के लिए राशि जारी करती है, तो संबंधित संस्था को यह प्रमाण देना होता है कि पैसा निर्धारित उद्देश्य के लिए खर्च किया गया है। इसी दस्तावेज को उपयोगिता प्रमाण पत्र कहा जाता है।

नियमों के अनुसार राशि मिलने के बाद तय समय सीमा के भीतर इसका हिसाब देना जरूरी होता है। लेकिन CAG रिपोर्ट के अनुसार बड़ी मात्रा में उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने से सरकारी खर्च की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब CAG रिपोर्ट के खुलासे के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है कि आखिर हजारों करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब क्यों नहीं दिया गया और जिन योजनाओं पर पैसा खर्च हुआ, उनका वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंचा।