कार्यभार संभालने के एक माह के भीतर एक्शन में चीफ जस्टिस: रोहतास और भागलपुर समेत 6 जिलों को दी कोर्ट विस्तार की सौगात

पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पदभार ग्रहण करने के मात्र एक माह के भीतर राज्य की न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ी पहल की है। आज शाम लगभग 43 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन किया गया

कार्यभार संभालने के एक माह के भीतर एक्शन में चीफ जस्टिस: रोह

Patna - अपने पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का कार्यभार संभालने के एक माह बाद ही  छह जिलों  में  कोर्ट के विस्तार का ऑनलाइन उद्घाटन आज किया।उन्होंने आज शाम पौने पांच बजे इनका उद्घाटन किया। 

जिन जिलों में  कोर्ट के विस्तार का आरम्भ होना है, इसमें रोहतास,शिवहर, बांका,भागलपुर,जमुई और शेखपुरा है। ये सारी परियोजना लगभग 43 करोड़ रुपये का है।रोहतास,डेहरी ऑन सोन, सब डिवीजन,रोहतास जिला, सासाराम में कोर्ट का विस्तार की योजना है।इसमें कोर्ट रूम,इमिनिटी बिल्डिंग और हाजत बिल्डिंग बनाया जाना है ।

शिवहर कोर्ट में  विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत एक एडीआर कम फैमिली कोर्ट बिल्डिंग,इमिनिटी बिल्डिंग और एक ई सेवा केंद्र बनाया जाना है। बांका जिले में एक जीमनाजियम,एक कैंटीन,एक डिजिटाईजेशन रूम और एक ई सेवा केंद्र बनाया जायेगा।साथ ही भागलपुर कोर्ट में एक इमिनिटी बिल्डिंग,एक हाजत और एक ई सेवा केंद्र की स्थापना की जाएगी। जमुई जजशिप में  एक ई सेवा केंद्र स्थापित किया जायेगा।साथ ही  शेखपुरा जजशिप में एक ई सेवा केंद्र की स्थापना होगी।

इस अवसर पर जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद, जस्टिस पार्थ सारथी, जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा,जस्टिस डा. अंशुमान, जस्टिस रितेश कुमार व जस्टिस अंशुल उपस्थित थे। इनके अलावा बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि,विधि विभाग के सचिव अंजनी कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिकारीगण व अन्य सम्बन्धित लोग उपस्थित थे। 

 नव निर्मित कोर्ट भवन में 10 अदालत कक्ष, न्यायाधीश कक्ष, पुस्तकालय, सम्मेलन कक्ष, कार्यालय, पार्किंग तथा दिव्यांगों सहित सभी के लिए सुविधाजनक शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं। एडीआर व फैमिली कोर्ट भवन से वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा मिलेगा, जबकि हाजत भवनों से विचाराधीन बंदियों को मानवीय व गरिमामय सुविधाएं मिलेंगी।

 ई-सेवा केंद्रों और डिजिटाइजेशन कक्षों से आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच आसान होगी। इन परियोजनाओं को न्यायिक प्रणाली को अधिक नागरिक-केंद्रित और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है।