खतरे में बचपन:तस्करी के टॉप-4 राज्यों में बिहार शामिल, NCRB की ताजा रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा के बाद बिहार देश का चौथा ऐसा राज्य है जहाँ मानव तस्करी के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में होने वाली तस्करी का एक बड़ा हिस्सा जबरन श्रम (Forced Labour) से जुड़ा है।

Childhood in danger Bihar among top 4 trafficking states NCR
खतरे में बचपन:तस्करी के टॉप-4 राज्यों में बिहार शामिल- फोटो : news 4 nation

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट (2023) के अनुसार, भारत में मानव तस्करी की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा के बाद बिहार देश का चौथा ऐसा राज्य है जहाँ मानव तस्करी के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियों और सामाजिक संगठनों की सक्रियता के बावजूद, तस्करों का जाल देश के विभिन्न हिस्सों में मजबूती से फैला हुआ है।

नाबालिग लड़कों की तस्करी में राजस्थान शीर्ष पर

रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिग लड़कों की तस्करी के मामले में राजस्थान पूरे देश में पहले पायदान पर है। यहाँ तस्करी किए गए कुल पीड़ितों में से लगभग 90% बच्चे (नाबालिग लड़के) होते हैं। इन बच्चों को मुख्य रूप से जयपुर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के चूड़ी कारखानों, ढाबों और घरेलू कामों में 'बंधुआ मजदूरी' के लिए लाया जाता है। राजस्थान के बाद बिहार के कई जिलों से भी लड़कों को काम के बहाने दूसरे राज्यों में तस्करी कर भेजा जा रहा है।

नाबालिग लड़कियों की तस्करी का संकट

नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामले में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सबसे अधिक प्रभावित राज्य बनकर उभरे हैं। आंकड़ों के अनुसार, इन राज्यों से लड़कियों को ऊंचे वेतन वाली नौकरियों या शादी का झांसा देकर तस्करी किया जाता है, जिसका अंतिम उद्देश्य अक्सर व्यावसायिक यौन शोषण (Commercial Sexual Exploitation) होता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि इन क्षेत्रों में सक्रिय संगठित अपराधी समूहों ने 'सप्लाई चेन' बना रखी है, जिससे लड़कियों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

बिहार के ट्रांजिट पॉइंट्स और मुख्य कारण

बिहार में मानव तस्करी के बढ़ते ग्राफ के पीछे गरीबी, बेरोजगारी और भौगोलिक स्थिति प्रमुख कारण हैं। राज्य के गया, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी और कटिहार जैसे जिले 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में चिन्हित किए गए हैं, जहाँ से पीड़ितों को हैदराबाद, बेंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भेजा जाता है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में होने वाली तस्करी का एक बड़ा हिस्सा जबरन श्रम (Forced Labour) से जुड़ा है, जो एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है।

कानूनी प्रावधान और भविष्य की चुनौतियाँ

तस्करी के इन डरावने आंकड़ों के बीच सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत कड़े प्रावधान लागू किए हैं। अब मानव तस्करी के दोषियों के लिए कड़ी सजा और जुर्माने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून पर्याप्त नहीं है; इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़ी निगरानी, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU) को सशक्त बनाने और जन-जागरूकता अभियानों की तत्काल आवश्यकता है ताकि इन आंकड़ों में कमी लाई जा सके।