सहायक प्राध्यापक बहाली की नई नियमावली पर कांग्रेस ने उठाया सवाल, सरकार से की यह मांग
बिहार सरकार द्वारा लाई गई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति की नई नियमावली को लेकर जहां NET-JRF और पीएचडी धारक अभ्यर्थियों में भारी असंतोष व्याप्त है। वहीं कांग्रेस ने अभ्यर्थियों का समर्थन करते नई नियमावली पर सवाल खड़ा किया है....
Patna : बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति की नई नियमावली को लेकर नेट, जेआरएफ (NET-JRF) और पीएचडी धारक अभ्यर्थियों में भारी असंतोष व्याप्त है। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने बुधवार (1 जुलाई 2026) को सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि नई नियमावली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियमावली के कारण अभ्यर्थियों का एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर (API) बेहद अतार्किक तरीके से तैयार किया गया है। उन्होंने मांग की कि बिहार की आगामी बहाली प्रक्रिया में यूजीसी की 2018 की मूल बहाली नियमावली के नियमों को ही पूरी तरह समावेशित किया जाए।
बिहार के युवाओं के हक के लिए डोमिसाइल नीति लागू करना बेहद जरूरी
मीडिया से बातचीत के दौरान प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने सहायक प्राध्यापक बहाली में डोमिसाइल नीति (Domicile Policy) को लागू करने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा डोमिसाइल नीति को दरकिनार किए जाने के कारण बिहार के योग्य नेट, जेआरएफ और पीएचडी धारकों को अपनी ही धरती पर नौकरियों से वंचित होना पड़ता है, जबकि दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी यहां आकर नियुक्ति पा जाते हैं। डॉ. वर्धन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को अपने राज्य के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देनी चाहिए और ज्यादा से ज्यादा मौका देना चाहिए, क्योंकि चाहे शिक्षक बहाली हो या सहायक प्राध्यापक बहाली, हर बार बिहार के छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।
फिक्स्ड टर्म नहीं बल्कि नियमित और स्थायी बहाली पर ध्यान दे सरकार
नियमावली की अन्य कमियों को उजागर करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने उम्र सीमा को 40 साल करने के प्रस्ताव को पूरी तरह गैर-जरूरी और अतार्किक बताया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की फिक्स्ड टर्म (निश्चित अवधि) नियुक्ति नीति का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि संविदा या फिक्स्ड टर्म जैसी अस्थायी व्यवस्था के स्थान पर राज्य सरकार को पूरी तरह नियमित और स्थायी बहाली (Permanent Appointment) करने की ओर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि उच्च शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
211 नए डिग्री कॉलेजों में लोक प्रशासन और पत्रकारिता जैसे विषयों को शामिल करने की मांग
डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने राज्य के उच्च शिक्षा ढांचे के विस्तार पर बात करते हुए सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि बिहार में खोले गए 211 नए डिग्री महाविद्यालयों में लोक प्रशासन (Public Administration), दर्शनशास्त्र (Philosophy), संस्कृत, और मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता (Mass Communication and Journalism) जैसे रोजगारपरक और पारंपरिक विषयों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करते हुए तत्काल इनके सहायक प्राध्यापकों की बहाली निकाली जानी चाहिए ताकि छात्रों को विविधतापूर्ण शिक्षा मिल सके।
लिखित परीक्षा के नाम पर बहाली लटकाने और पल्ला झाड़ने का हथकंडा
नई नियमावली के तहत आयोजित की जाने वाली लिखित परीक्षा के प्रावधान पर बोलते हुए बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार युवाओं को समय पर नियुक्ति न देना पड़े, इसीलिए ऐसे नए-नए हथकंडे अपनाती है। उन्होंने आशंका जताई कि लिखित परीक्षा के माध्यम से ऐसी परिस्थितियां पैदा की जाती हैं जहाँ पेपर लीक (Paper Leak) हो या प्रश्नों पर आपत्तियां दर्ज कराई जाएं, ताकि बहाली प्रक्रिया सालों-साल अदालतों और आयोगों में लटकी रहे और सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ती रहे।
नरोत्तम की रिपोर्ट