शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाए जाने पर कांग्रेस ने शिक्षा विभाग को घेरा, कहा-भीषण गर्मी में दोहरे कार्य का बोझ अमानवीय

Bihar Politics : बिहार शिक्षा विभाग ने एक निर्देश जारी किया है, जिसके तहत शिक्षकों को आगामी 2027 की राष्ट्रीय जनगणना के प्रारंभिक कार्यों में लगाया गया है। कांग्रेस ने इस निर्देश को अमानवीय करार दिया है.....

शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाए जाने पर कांग्रेस ने शिक्ष

Patna : बिहार में लगातार बढ़ रहे पारे और भीषण गर्मी के बीच शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को लेकर जारी किए गए एक नए आदेश पर सियासत गरमा गई है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के चेयरमैन सह मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने इस फैसले को आड़े हाथों लेते हुए इसे पूरी तरह से अनुचित और अमानवीय करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे का शिक्षा विभाग इस चिलचिलाती धूप और हीटवेव के बीच शिक्षकों के साथ घोर ज्यादती कर रहा है।


स्कूली समय के बाद जनगणना ड्यूटी का आदेश पूरी तरह अनुचित

कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने बताया कि बिहार शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को एक निर्देश जारी किया है, जिसके तहत शिक्षकों को आगामी 2027 की राष्ट्रीय जनगणना के प्रारंभिक कार्यों में लगाया गया है। इस आदेश की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि शिक्षक विद्यालय समय के पहले या स्कूल की छुट्टी होने के बाद ही जनगणना से जुड़े कार्यों को पूरा करेंगे। राजेश राठौड़ ने कहा कि भरी दोपहरी में जब आम लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जा रही है, तब शिक्षकों पर इस तरह का दोहरा बोझ लादना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।


पढ़ाई प्रभावित न होने की आड़ में शिक्षकों का मानसिक-शारीरिक शोषण

विभाग के इस तर्क पर कि 'स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए यह व्यवस्था की गई है', पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि यह केवल बहानेबाजी है। इस तुगलकी फरमान से यह साफ हो गया है कि शिक्षक अपने निर्धारित स्कूल टाइमिंग में जनगणना का काम नहीं कर सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि अपनी नियमित ड्यूटी खत्म करने के बाद भी उन्हें भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच लगातार सरकारी काम के लिए गांवों और मोहल्लों में भटकना पड़ेगा, जिससे उनकी मुश्किलें अत्यधिक बढ़ गई हैं।


हीटवेव के बीच 'वर्क लोड' बढ़ाना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

राजेश राठौड़ ने राज्य सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान समय में बिहार का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम वैज्ञानिक लगातार लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने और खुद को सुरक्षित रखने की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे जानलेवा मौसम में राष्ट्र के निर्माताओं (शिक्षकों) को इस प्रकार के कठिन और अतिरिक्त फील्ड वर्क में धकेलना शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।


आदेश को तुरंत वापस लेने और राहत देने की मांग

बिहार कांग्रेस ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से इस अमानवीय आदेश की समीक्षा करने और इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षकों से शिक्षण कार्य के अलावा गैर-शैक्षणिक कार्य करवाना और वह भी इस जानलेवा गर्मी में, किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शिक्षकों को इस दोहरे कार्यभार से मुक्ति नहीं दिलाई, तो कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाएगी।


नरोत्तम की रिपोर्ट