Bihar Road: दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड में देरी, भूमि अधिग्रहण और स्वीकृति बनी बड़ी वजह, अब कब मिलेगा राहत?

Bihar Road: दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड फिलहाल सिस्टम की सुस्ती और जमीन अधिग्रहण के पेंच में उलझ गया है।

Delay in Danapur Bihta Elevated Road Land Issues Stall Relie
दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड में देरी- फोटो : social Media

Bihar Road: बिहार में विकास की तस्वीर को चौड़ी सड़कों और एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए नया रंग देने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दानापुर–बिहटा एलिवेटेड रोड फिलहाल सिस्टम की सुस्ती और जमीन अधिग्रहण के पेंच में उलझ गया है। एक तरफ सरकार और विभाग ताबड़तोड़ रोड प्रोजेक्ट्स का ढोल पीट रहे हैं, तो दूसरी ओर यह अहम परियोजना ज़मीनी हकीकत से जूझती नजर आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह जमीन अधिग्रहण में देरी और रैयती स्ट्रक्चर का नहीं हटना बताया जा रहा है।

खास तौर पर महादेव फुलाड़ी और पतसा मौजा इस एलिवेटेड रोड के लिए ‘बॉटलनेक’ बन गए हैं। महादेव फुलाड़ी में रैयती जमीन पर बने स्ट्रक्चर नहीं हटने से निर्माण कार्य बाधित है, वहीं रोड क्लोजर की समुचित व्यवस्था नहीं होने से भी काम की रफ्तार पर ब्रेक लगा है। नतीजा यह कि जो परियोजना सितंबर 2026 तक पूरी होनी थी, अब उसके करीब सात महीने लेट होने की संभावना जताई जा रही है। यानी दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड अब मार्च 2027 तक ही बनकर तैयार हो सकेगी।

आंकड़े भी इस देरी की कहानी बयां करते हैं। महादेव फुलाड़ी मौजे में सिर्फ सात रैयतों को मुआवजा मिला है, जबकि पतसा मौजे में महज दो रैयतों को भुगतान हो सका है। मुआवजे में देरी से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अटक गई है। इतना ही नहीं, कुछ रैयत मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं, जिससे प्रशासन और प्रभावित लोगों के बीच खींचतान की स्थिति बन गई है। हालांकि विभाग का दावा है कि भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है।

काम की प्रगति पर नजर डालें तो दानापुर की तरफ लगभग 40 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन बिहटा की ओर तस्वीर उतनी उत्साहजनक नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, कुल 22 मौजों में 104 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है और 1002 रैयतों को करीब 191 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। दानापुर एसडीओ का कहना है कि कागजात में कमी और सत्यापन की प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी होती है, जांच पूरी होने के बाद मुआवजा दिया जा रहा है।

 दिसंबर में पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने परियोजना का निरीक्षण कर तय समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए थे। निर्माण एजेंसी ने भी भरोसा दिलाया था, लेकिन फिलहाल जमीन और मुआवजे की राजनीति ने विकास के इस एलिवेटेड सपने को ज़मीन पर ही रोक दिया है।