जहरीले बोल बोलने वाले नेताओं को भेजो 'सुधार गृह', 3 महीने के लिए करो बंद! भाषाई और क्षेत्रवादी नफरत फैलानेवालों पर बरसे दिलीप जायसवाल
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने डीएमके सांसद दयानिधि मारन की विवादास्पद टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए केंद्र सरकार से एक अनोखी मांग की है। जायसवाल ने क्षेत्रवाद और भाषाई वैमनस्य फैलाने वाले नेताओं को 'सुधारने' के लिए कड़े कदम उठ
Patna - बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने डीएमके सांसद दयानिधि मारन के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि जिन नेताओं की जुबान पर लगाम नहीं है, उनके लिए विशेष 'सुधार गृह' बनाया जाना चाहिए। जायसवाल का मानना है कि ऐसे नेताओं के व्यवहार में बदलाव लाना देश के विकास के लिए अनिवार्य है।
"पकड़कर 3 महीने के लिए डालें जेल"
मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे नेताओं को चिह्नित कर पकड़ना चाहिए और कम से कम तीन महीने के लिए सुधार गृह में डाल देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब ये नेता अपनी भाषा और आचरण में सुधार करेंगे, तभी देश सही दिशा में आगे बढ़ेगा। उनके अनुसार, समाज में भाषाई मर्यादा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
क्षेत्रवाद का जहर बोने वालों को चेतावनी
महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए जायसवाल ने कहा कि जिस तरह ठाकरे ब्रदर्स ने क्षेत्रवाद और भाषा के नाम पर जहर बोने का काम किया, उसका परिणाम सबके सामने है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की जनता ऐसे लोगों और राजनीतिक दलों को स्वीकार नहीं करेगी जो समाज को बांटने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि जो हाल महाराष्ट्र में हुआ, वही हाल हर उस जगह होगा जहाँ क्षेत्रवाद को बढ़ावा दिया जाएगा।
बिहार के गौरव और नितिन नवीन पर चर्चा
अपने संबोधन के दौरान दिलीप जायसवाल ने बिहार के लिए एक गौरवशाली क्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। उनके अनुसार, 19 जनवरी को नामांकन की प्रक्रिया होगी और 20 तारीख को इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी, जो बिहार के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
मीडिया से अपील और देशव्यापी चर्चा
मंत्री ने मौजूद मीडिया कर्मियों से आग्रह किया कि इस विषय को पूरे देश में प्रमुखता से उठाया जाए। उन्होंने कहा कि गलत बयानबाजी करने वाले नेताओं पर अंकुश लगाने के लिए एक राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता है। जायसवाल के अनुसार, सुधार गृह जैसा कड़ा कदम ही राजनीति में शुचिता और भाषाई मर्यादा वापस ला सकता है।
राजनीति में बढ़ती कड़वाहट पर चिंता
जायसवाल ने चिंता जताई कि वर्तमान समय में कुछ नेता बिना सोचे-समझे किसी भी राज्य या समुदाय के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर देते हैं। उन्होंने कहा कि भाषाई वैमनस्य समाज के ताने-बाने को कमजोर करता है। केंद्र सरकार को इस पर संज्ञान लेते हुए एक प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए ताकि कोई भी नेता देश की एकता और अखंडता से खिलवाड़ न कर सके।
रिपोर्ट - वंदना शर्मा