Diwali Special Train Delay: घर में जलाने थे दीप, स्टेशन पर कटेगी दीपावली! 35 घंटे तक लेट चल रही स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों में मचा हाहाकार
Diwali Special Train Delay: घर में जलाने थे दीप लेकिन रेलवे की लेटलतीफी ने हजारों यात्रियों के अरमानों पर पानी फेर दिया।
Diwali Special Train Delay: घर में दीप जलाने थे, बच्चों के साथ खुशियां बांटनी थीं और अपनों के बीच दीपावली का त्योहार मनाने की तैयारी थी। लेकिन रेलवे की लेटलतीफी ने हजारों यात्रियों के अरमानों पर पानी फेर दिया। त्योहार पर अपने घर लौटने की उम्मीद लेकर निकले यात्रियों का सफर किसी मुसीबत से कम नहीं रह गया। किसी की ट्रेन पांच घंटे विलंब से चल रही है तो किसी को 14 से 35 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि दीपावली पर घर पहुंचने का सपना देखने वाले यात्री ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर ही त्योहार गुजारने को मजबूर हैं।रेलवे ने त्योहारों में यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन इन ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों को जिस सुविधा और सहूलियत की उम्मीद थी, वही अब परेशानी और मानसिक तनाव का सबब बन गई है।
35 घंटे 15 मिनट लेट चल रही उधना-मधुबनी स्पेशल ट्रेन
ट्रेनों की लेटलतीफी का सबसे बड़ा उदाहरण उधना-मधुबनी स्पेशल ट्रेन संख्या 09035 है। यह ट्रेन करीब 35 घंटे 15 मिनट की देरी से चल रही है। वहीं, सीएसएमटी से मुजफ्फरपुर आने वाली ट्रेन संख्या 01081 लगभग 14 घंटे 47 मिनट विलंब से परिचालित हो रही है। इसके अलावा हावड़ा से नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन संख्या 04053 भी नौ घंटे एक मिनट की देरी से चल रही है। लंबी दूरी की इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निर्धारित समय पर घर पहुंचने की उनकी योजना पूरी तरह बिगड़ गई है।
पटना आने वाली स्पेशल ट्रेनें भी घंटों विलंब से
बिहार की राजधानी पटना आने वाली ट्रेनों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। आनंद विहार टर्मिनल से पटना आने वाली ट्रेन संख्या 03294 आठ घंटे से अधिक विलंब से चल रही है।वहीं, उधना फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन संख्या 09036 करीब आठ घंटे 26 मिनट और गोंदिया-पटना स्पेशल ट्रेन संख्या 08895 पांच घंटे 11 मिनट की देरी से परिचालित हो रही है। इसके अलावा दाउदपुर, बक्सर और नई दिल्ली से आने-जाने वाली दूसरी स्पेशल ट्रेनें भी तीन से सात घंटे तक विलंब से चल रही हैं।इस लेटलतीफी ने उन यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिन्होंने दीपावली और छठ महापर्व पर परिवार के साथ समय बिताने के लिए पहले से यात्रा की योजना बनाई थी।
प्लेटफॉर्म पर इंतजार, आंखों में अपनों से मिलने की आस
ट्रेन का निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब प्लेटफॉर्म पर गाड़ी नहीं पहुंचती तो यात्रियों की बेचैनी बढ़ने लगती है। बार-बार बदलते आगमन समय ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। यात्रियों को समझ नहीं आ रहा कि प्लेटफॉर्म पर बैठे रहें या कहीं दूसरी जगह जाकर समय बिताएं।सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है, जो छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ सफर कर रहे हैं। घंटों इंतजार के बाद जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंचती है तो सामान्य और स्लीपर कोच के दरवाजों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को रास्ता नहीं मिल पाता, वहीं चढ़ने की जल्दबाजी में धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है। सामान के साथ बच्चों को संभालते हुए कोच तक पहुंचना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बच्चों और बुजुर्गों के साथ प्लेटफॉर्म पर कट रही रात
पटना जंक्शन समेत बिहार के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ के कारण बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है। कई परिवारों को बच्चों और बुजुर्गों के साथ घंटों प्लेटफॉर्म पर गुजारने पड़ रहे हैं।लंबे इंतजार के कारण पेयजल, खानपान और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। छोटे बच्चों को समय पर भोजन नहीं मिल पा रहा है, जबकि बुजुर्ग यात्रियों को लगातार बैठने और आराम करने की जगह तलाशनी पड़ रही है।जिन लोगों ने त्योहार पर घर पहुंचने के लिए नौकरी और कामकाज से छुट्टी ली थी, उनका पूरा कार्यक्रम बिगड़ गया है। दीपावली की खुशियों की जगह अब थकान, चिंता और अनिश्चितता ने ले ली है।
यात्रियों का सवाल- स्पेशल ट्रेनें चलाने का क्या फायदा, जब समय पर पहुंचें ही नहीं?
यात्रियों का कहना है कि त्योहारों में केवल अतिरिक्त ट्रेनें चलाना पर्याप्त नहीं है। रेलवे को इन ट्रेनों का समयबद्ध परिचालन भी सुनिश्चित करना चाहिए। यदि स्पेशल ट्रेनें 10, 15 या 35 घंटे तक विलंब से चलेंगी तो यात्रियों को राहत मिलने के बजाय उनकी परेशानी और बढ़ेगी।यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। साथ ही प्रमुख स्टेशनों पर पेयजल, शौचालय, बैठने की जगह और अन्य जरूरी सुविधाओं का पर्याप्त इंतजाम किया जाए।
त्योहार पर घर पहुंचाने के दावे और रेलवे की व्यवस्था पर सवाल
दीपावली और छठ बिहार के सबसे बड़े त्योहारों में शामिल हैं। इन अवसरों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले लाखों लोग अपने घर लौटते हैं। ऐसे में रेलवे की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।लेकिन जब त्योहार के मौके पर स्पेशल ट्रेनें ही कई-कई घंटे विलंब से चलें तो यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? अब जरूरत इस बात की है कि रेलवे केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि उनके परिचालन और यात्री सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दे। आखिर यात्रियों को दीपावली की रोशनी अपने घरों में देखनी थी, रेलवे प्लेटफॉर्म पर रात गुजारने के लिए नहीं निकलना था।