प्रशांत किशोर की आई पैक पर बड़ी कार्रवाई ! ED ने हैदराबाद, बेंगलुरु सहित इन जगहों पर की छापामारी

जनसुराज के प्रशांत किशोर द्वारा गठित आई पैक के कई कार्यालयों पर ईडी ने छापेमारी की है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का चुनाव प्रबंधन भी आई पैक के जिम्मे बताया जाता है

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I-PAC- फोटो : news4nation

ED raids on I-PAC :  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल कोयला तस्करी मामले में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में I-PAC के ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई से चुनावी माहौल के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। अभी पश्चिम बंगाल में चुनाव के सरगर्मी है। वहां विधानसभा चुनाव का प्रचार जारी है और आई पैक द्वारा ममता की पार्टी का चुनाव प्रबंधन देखने की बात कही जा रही हैं. इसी बीच यह छापेमारी हुई है।


अधिकारियों ने बताया कि I-PAC से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली जा रही थी। ऑपरेशन के दौरान बेंगलुरु में I-PAC के डायरेक्टरों में से एक ऋषि राज सिंह के ठिकानों पर भी ED की नज़र पड़ी। यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल कोयला आपूर्ति घोटाला के कथित मामला से जुड़ा बताया जा रहा है। 


बताया जा रहा है कि इससे पहले 8 जनवरी को भी I-PAC के कोलकाता कार्यालय पर ED ने छापा मारा था। उस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कार्यालय पहुंच गई थीं और ED की कार्रवाई का विरोध किया था।


पश्चिम बंगाल में है चुनाव 

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इस समय विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार जोरों पर है। इसी बीच I-PAC पर कार्रवाई को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह संस्था चुनावी रणनीति और प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाती रही है।


सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

इस मामले को लेकर 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई थी। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार से ED की याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताने को लेकर सवाल उठाए थे। ED ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 8 जनवरी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली थी।


 प्रशांत किशोर की आई पैक 

I-PAC की स्थापना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी। उनकी टीम देश के कई राज्यों में राजनीतिक दलों के लिए चुनाव प्रबंधन कर चुकी है और वर्तमान में भी ममता बनर्जी की पार्टी के लिए काम करने की चर्चा है।


बिहार में नहीं मिली सफलता 

वहीं, प्रशांत किशोर ने हाल ही में बिहार में ‘जन सुराज’ के जरिए राजनीतिक किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ED की इस ताजा कार्रवाई को चुनावी समय में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, जिस पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।