करोड़ों की 'थाली' का हिसाब गोल! 97 लाख बच्चों की थालियों के पैसे का नहीं मिला हिसाब, जवाब नहीं मिला तो नपेंगे अधिकारी, निदेशक का कड़ा फरमान

बिहार में 97 लाख स्कूली बच्चों के लिए खरीदी गई स्टील की थालियों का करोड़ों का हिसाब फंस गया है। शिक्षा विभाग ने उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने वाले अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया है। हिसाब नहीं मिलने पर दोषी पदाधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।

करोड़ों की 'थाली' का हिसाब गोल! 97 लाख बच्चों की थालियों के

Patna : बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए खरीदी गई स्टील की थालियों के खर्च को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सत्र 2023-24 और 2024-25 (संभावित 2025-26) में करोड़ों की लागत से खरीदी गई थालियों का 'उपयोगिता प्रमाण पत्र' (UC) जिलों ने अब तक विभाग को नहीं सौंपा है। इसे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका मानते हुए शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।

71 हजार स्कूलों के लिए हुई थी खरीदारी 

मध्याह्न भोजन योजना (MDM) के तहत राज्य के 71,863 प्रारंभिक विद्यालयों में नामांकित 97 लाख बच्चों के लिए स्टील की थालियां खरीदी गई थीं। निदेशालय ने जिला स्तर पर इसके लिए राशि आवंटित की थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DP-MDM) ने इसका हिसाब नहीं दिया है।

15 दिनों की मोहलत, वरना होगा एक्शन 

मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय के निदेशक विनायक मिश्र ने बुधवार को सभी जिला पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि अगले 15 दिनों के भीतर खर्च का पूरा हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने वाले पदाधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पेनड्राइव में मांगी स्कूलों की सूची 

निदेशालय ने न केवल हिसाब मांगा है, बल्कि उन स्कूलों की सूची भी 'सॉफ्ट कॉपी' (पेनड्राइव) में मांगी है जहाँ थालियां खरीदी गई हैं। इसमें वर्ग 1 से 5 और 6 से 8 में बच्चों का नामांकन, पहले से उपलब्ध थालियां और नवंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच खरीदी गई नई थालियों की सटीक संख्या की जानकारी देनी होगी। प्रधानाध्यापकों द्वारा दी गई इस जानकारी का सत्यापन प्रखंड साधनसेवी (BRP) करेंगे।


  • ·