फरक्का पर बिहार बनाम केंद्र की नई जंग, पानी के सवाल लालू ने सुनाई खरी खोटी

Farakka Water Treaty: बिहार में बाढ़, गंगा में बढ़ती गाद और फरक्का बैराज का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। ...

Farakka Row Escalates as Bihar Pushes Water Interests in Del
फरक्का पर बिहार बनाम केंद्र की नई जंग- फोटो : social Media

Farakka Water Treaty: बिहार में बाढ़, गंगा में बढ़ती गाद और फरक्का बैराज का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई बैठक के बाद बिहार सरकार ने दावा किया है कि केंद्र से राज्य के हितों को लेकर सकारात्मक आश्वासन मिला है। अब फरक्का जलसंधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने से पहले बिहार ने दिल्ली पर दबाव बढ़ा दिया है।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के मुताबिक, केंद्र के सामने साफ तौर पर बिहार का पक्ष रखा गया है और संधि के नवीनीकरण के समय राज्य के हितों को ध्यान में रखने का भरोसा दिया गया है। हालांकि, अभी केंद्र की ओर से संधि खत्म करने या उसके नवीनीकरण से इनकार करने का कोई औपचारिक फैसला नहीं आया है। लेकिन दिल्ली से मिले आश्वासन ने बिहार की सियासत को नया मुद्दा जरूर दे दिया है।

जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा का तर्क है कि भविष्य की किसी भी जल व्यवस्था में बिहार समेत पूरे गंगा बेसिन के राज्यों की पानी की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। बिहार की मांग है कि भारत-बांग्लादेश जल समझौते को केवल कूटनीतिक रिश्तों के चश्मे से नहीं, बल्कि बाढ़, सिंचाई, गाद और जल सुरक्षा के व्यापक नजरिये से देखा जाए।

इसी मुद्दे पर आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने सियासी हमला तेज कर दिया है। उन्होंने संजय झा पर निशाना साधते हुए कहा कि फरक्का के इतिहास और भूगोल की जानकारी के बिना बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। लालू ने दावा किया कि आरजेडी ने संसद से लेकर सरकार तक फरक्का बैराज का विरोध किया था और उन्होंने पहले ही इसके संभावित नुकसान को लेकर चेताया था।

लालू यादव ने नीतीश कुमार पर भी हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में फरक्का के मुद्दे पर कभी आवाज नहीं उठाई और दीर्घकालिक हितों के बजाय तात्कालिक राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी। उन्होंने जल संसाधन विभाग के दस्तावेजों और तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह के केंद्र से हुए पत्राचार का अध्ययन करने की नसीहत भी दी।दरअसल, 1996 की फरक्का जलसंधि की अवधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। ऐसे में संजय झा द्वारा मौजूदा स्वरूप में संधि का नवीनीकरण नहीं करने की मांग और बिहार सरकार की दिल्ली दौड़ ने संकेत दे दिया है कि आने वाले महीनों में फरक्का का पानी बड़ा सियासी हथियार बन सकता है। अब निगाहें केंद्र की अगली रणनीति और भारत-बांग्लादेश बातचीत पर टिकी हैं।