सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार का बड़ा फैसला, हाईवे से 20 दिनों में हटेंगे अवैध ढाबे और होटल
Bihar News : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एनएच पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में स्थित सभी अनधिकृत ढाबा, होटल और अन्य व्यावसायिक संरचनाओं को हटाने के लिए महज 20 दिनों का अल्टीमेटम दिया है...
Patna : राष्ट्रीय उच्च पथों (NH) पर बढ़ते अतिक्रमण, अनधिकृत पार्किंग और असुरक्षित व्यावसायिक गतिविधियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए बिहार सरकार ने एक व्यापक अभियान चलाने का कड़ा निर्देश दिया है। इस संबंध में बुधवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार सड़क सुरक्षा परिषद् के सभी पणधारी विभागों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में परिवहन, पथ निर्माण, एनएचएआई (NHAI), नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पुलिस मुख्यालय के तमाम शीर्ष अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार सख्त
यह महत्वपूर्ण बैठक नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण व अनधिकृत पार्किंग के कारण हुई दो भीषण सड़क दुर्घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान के बाद बुलाई गई थी। उन हादसों में 34 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को हाईवे सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त करने के कड़े निर्देश दिए थे। इसी अनुपालन में बिहार सरकार ने अब हाईवे के 'राइट ऑफ वे' (Right of Way) क्षेत्र में भारी और व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, अब केवल निर्धारित ट्रक ले-बाय और वे-साइड अमेनिटी स्थलों पर ही पार्किंग की अनुमति होगी।
अवैध निर्माण हटाने के लिए 20 दिनों का अल्टीमेटम
सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में स्थित सभी अनधिकृत ढाबा, होटल और अन्य व्यावसायिक संरचनाओं को हटाने के लिए महज 20 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर संचालक स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं, तो संबंधित जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित 'डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स' जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर संयुक्त बुलडोजर कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही हाईवे के राइट ऑफ वे क्षेत्र में किसी भी नए ढाबे, होटल या व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है और भविष्य में किसी भी निर्माण के लिए एनएचएआई या पथ निर्माण विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा।
खुद बनाना होगा वैकल्पिक पहुंच पथ, वरना सील होंगे प्रतिष्ठान
नियमों के मुताबिक, वैसे पुराने स्थापित ढाबे, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान जिनका प्रवेश और निकास सीधे राष्ट्रीय उच्च पथ से होता है, उन्हें अब अनिवार्य रूप से अपने खर्च पर वैकल्पिक पहुंच पथ (एप्रोच रोड) का निर्माण करना होगा। ऐसा नहीं करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ 'कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवे एक्ट 2002' के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पथ निर्माण विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि राइट ऑफ वे क्षेत्र के बाहर, लेकिन हाईवे सेफ्टी जोन (आवासीय क्षेत्रों के लिए 40 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए 75 मीटर) के भीतर स्थित संरचनाओं के लिए भी संबंधित विभाग से विधिवत एनओसी लेना अनिवार्य होगा।
टोल-फ्री नंबर 1033 और ऐप पर दे सकते हैं सूचना
सड़क सुरक्षा को एक जन-आंदोलन बनाने के लिए सरकार ने तकनीक और आम जनता का सहयोग लेने का भी फैसला किया है। राष्ट्रीय उच्च पथों पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या अवैध पार्किंग की शिकायत नागरिक टोल-फ्री नंबर 1033 तथा 'राजमार्ग यात्रा' ऐप के माध्यम से सीधे दर्ज करा सकते हैं। बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने राज्य के सभी नागरिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और वाहन संचालकों से अपील की कि वे सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने और मानव जीवन की सुरक्षा के व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए इन सरकारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
धीरज परासर की रिपोर्ट