डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर पूर्व मंत्री मंगल पांडेय ने किया नमन, राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को किया याद

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर पूर्व मंत्री मं

Patna : बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और महान शिक्षाविद ’’भारत केसरी’’ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं पावन जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस अवसर पर जारी एक विशेष वक्तव्य में श्री पांडेय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन मां भारती की सेवा, राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित रहा। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था, वे न केवल एक दृढ़ राजनेता थे, बल्कि देश के महानतम शिक्षाविदों में से एक थे।


कोलकाता में लगेगी 125 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा: गृहमंत्री अमित शाह करेंगे शिलान्यास

मंगल पांडेय ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का पश्चिम बंगाल की धरती से अत्यंत गहरा और अटूट नाता था। उनकी 125वीं जयंती पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा विशेष सार्वजनिक अवकाश घोषित करना और विशाल स्मृति समारोह का आयोजन करना बेहद सराहनीय है। इसके साथ ही, कोलकाता में डॉ. मुखर्जी की 125 फीट ऊंची भव्य व ऐतिहासिक प्रतिमा का शिलान्यास देश के माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी द्वारा किया जाना हर राष्ट्रभक्त के लिए गौरव का क्षण है।


बिहार सरकार का स्वागत योग्य फैसला: हर जिला मुख्यालय में डॉ. मुखर्जी के नाम पर बनेगा पार्क या सड़क

बिहार के संदर्भ में बात करते हुए श्री पांडेय ने कहा कि डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा ऐलान किया है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर एक पार्क या सड़क का निर्माण और नामकरण किया जाएगा। भाजपा नेता ने इस पहल का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य डॉ. मुखर्जी के विचारों, देश की एकता-अखंडता के लिए उनके बलिदान और राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।


विभाजन के समय विफल की बड़ी साजिश: पश्चिम बंगाल को भारत में बनाए रखा

देश के विभाजन के समय डॉ. मुखर्जी की भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री पांडेय ने कहा कि अत्यंत कठिन और संवेदनशील कालखंड में उनके द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को यह राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता। जब देश का बंटवारा हो रहा था, तब पूरे बंगाल को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में शामिल करने की एक गहरी साजिश रची जा रही थी। यह डॉ. मुखर्जी के प्रखर राष्ट्रवाद, दूरदर्शिता और अदम्य साहस का ही परिणाम था कि उन्होंने इस साजिश को पूरी तरह विफल किया और पश्चिम बंगाल को बचाकर भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखा।


अनुच्छेद 370 का खात्मा: मोदी सरकार ने साकार किया डॉ. मुखर्जी का 'एक विधान, एक प्रधान' का सपना

श्री पांडेय ने जोर देकर कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से ’’राष्ट्र प्रथम’’ के सिद्धांत को जीने वाले महापुरुष थे। उन्होंने आजाद भारत में देश के भीतर 'दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' (कश्मीर में अलग झंडा और अलग संविधान) की व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया था और कश्मीर आंदोलन के दौरान मां भारती की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया था। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को पूरी तरह समाप्त कर डॉ. मुखर्जी के 'एक विधान, एक प्रधान, एक निशान' के ऐतिहासिक सपने को धरातल पर साकार कर दिया है।


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