गिरिधारी यादव की नहीं जाएगी लोकसभा सदस्यता ! नीतीश की जदयू को लगेगा बड़ा झटका

जदयू द्वारा बांका सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता रद्द करने को लेकर दिए गए नोटिस के बाद भी इस मामले में नीतीश कुमार की पार्टी को झटका लगता हुआ दिख रहा है.

Giridhari Yadav
Giridhari Yadav - फोटो : news4nation

Giridhari Yadav:  बांका से सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता रद्द करने को लेकर जदयू द्वारा लोकसभा स्पीकर को नोटिस दिए जाने के बाद उनकी सदस्यता पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी सांसदी जाने की संभावना बेहद कम है। इसके कई कारण हैं और पूर्व में ही इस तरह के मामलों में लोकसभा सदस्यता रद्द करने का मामला अटक चुका है। 


दरअसल, किसी सांसद की सदस्यता खत्म करने का अधिकार सीधे तौर पर पार्टी के पास नहीं होता। इसके लिए संविधान की 10वीं अनुसूची, जिसे दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है, लागू होती है। इस कानून के तहत सदस्यता केवल दो स्थितियों में समाप्त हो सकती है, इसमें पहला यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ दे या पार्टी के व्हिप के खिलाफ वोट करे। हालंकि ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष को करना होता है लेकिन उनके हाथ भी नियमों से बंधे होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है निर्णय 

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने जी. विश्वनाथन और अमर सिंह मामलों में कहा है कि यदि पार्टी किसी सांसद को निष्कासित भी कर दे, तब भी वह मूल पार्टी का सदस्य माना जाता है, जब तक वह किसी अन्य दल में शामिल नहीं हो जाता। ऐसे मामलों में सांसद सदन में अनअटैच्ड सदस्य के रूप में बने रहते हैं।


गिरधारी के बेटे पर दूसरे दल से चुनाव लड़ने का आरोप

गिरधारी यादव के बेटे ने विधानसभा चुनाव 2025 में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। जदयू ने इसे मुद्दा बनाया है। लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब जदयू के किसी नेता के परिजन ने दूसरे दल से चुनाव लड़ा हो। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी हजारी ने कांग्रेस और अशोक चौधरी की बेटी शाम्भवी चौधरी ने LJP(R) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसके बावजूद दोनों नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।


कार्रवाई के पीछे राजनीतिक गणित

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश्वर हजारी और अशोक चौधरी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और दलित समाज से आते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई से दलित समाज में गलत संदेश जा सकता था। वहीं, गिरिधारी यादव के मामले में पार्टी सख्त रुख अपनाकर संगठन में अनुशासन का संदेश देना चाहती है। इसका एक कारण  गिरिधारी यादव का यादव जाति से आना है। चुकी यादव वर्ग को मुख्य रूप से नीतीश कुमार का वोटर भी नहीं माना जाता है ऐसे में गिरिधारी पर कार्रवाई होने से जदयू को किसी प्रकार के वोटों के नुकसान का डर नहीं है। ऐसे में कुल मिलाकर, JDU का नोटिस राजनीतिक दबाव जरूर बनाता है, लेकिन गिरिधारी यादव की सांसदी पर तत्काल कोई खतरा नजर नहीं आता।