Bihar Education Department: राज्यपाल और शिक्षा मंत्री की अहम बैठक, आज लोकभवन में होगी हाईलेवल मीटिंग,सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति भी होंगे शामिल

Bihar Education Department:आज शाम 4 बजे लोकभवन में होने वाली इस बैठक में कुलाधिपति सैयद अता हसनैन, उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री और सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति व वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।...

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राज्यपाल और शिक्षा मंत्री की अहम बैठक- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Education Department: पटना से आज एक बेहद अहम और हाई-लेवल बैठक की खबर सामने आ रही है, जो बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। आज शाम 4 बजे लोकभवन में होने वाली इस बैठक में कुलाधिपति सैयद अता हसनैन, उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री और सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति व वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

इस बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा है  समर्थ पोर्टल (Samarth Portal) की लगातार आ रही तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं और उनका त्वरित समाधान। यह वही डिजिटल सिस्टम है जिसके जरिए अब एडमिशन, परीक्षा फॉर्म, रिजल्ट और छात्र-प्रशासन से जुड़ी लगभग सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जा रही हैं।

लेकिन इस डिजिटल बदलाव के बीच सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब यह सामने आया कि राज्य के विश्वविद्यालयों में 13 लाख से अधिक डिग्रियां अब तक पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सकी हैं। इस गंभीर लापरवाही पर कुलाधिपति ने नाराजगी जताते हुए सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। आदेश दिया गया है कि सभी लंबित डिग्रियों को एक महीने के भीतर हर हाल में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाए।

सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक चर्चा नहीं बल्कि डिजिटल जवाबदेही तय करने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है। विश्वविद्यालयों में वर्षों से चले आ रहे मैनुअल सिस्टम को खत्म कर पारदर्शिता और गति लाने के लिए सरकार अब सख्त रुख अपनाने के मूड में है। शिक्षा मंत्री संजय टाइगर की मौजूदगी में यह भी तय किया जाएगा कि तकनीकी गड़बड़ियों, स्टाफ की कमी और डेटा एंट्री से जुड़ी समस्याओं को कैसे तुरंत दूर किया जाए। कई विश्वविद्यालयों में पोर्टल की धीमी गति और सर्वर इश्यू को लेकर छात्रों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे प्रशासन पर दबाव भी बढ़ गया है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह बैठक बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की असली परीक्षा साबित हो सकती है। अगर समय पर सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच तनाव और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, लोकभवन की यह बैठक सिर्फ एक प्रशासनिक चर्चा नहीं, बल्कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक डिजिटल ढांचे में ढालने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।