Bihar water problem: फुलवारीशरीफ में नलों से आ रहा बदबूदार पानी, 30 हजार लोग बीमारियों के खतरे में
Bihar water problem: फुलवारीशरीफ में हर घर जल योजना फेल हो गया है। नलों से बदबूदार और दूषित पानी निकल रहा है। 30 हजार से ज्यादा आबादी डायरिया और पीलिया के खतरे में।
Bihar water problem: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना भले ही कागजों में सफल दिख रही हो, लेकिन फुलवारीशरीफ प्रखंड में यह योजना अब लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि बीमारी की वजह बनती जा रही है। लोग हर महीने पानी का बिल चुका रहे हैं, फिर भी सप्लाई का पानी पीने लायक नहीं है।
नलों से निकल रहा बदबूदार और गंदा पानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि नल से आने वाले पानी में तेज बदबू होती है। कई बार तो पानी के साथ कीड़े-मकोड़े भी निकल आते हैं। पुलिस कॉलोनी, पहाड़पुर, हरनीचक, बलमीचक, कसाई टोला, कचहरी मोहल्ला, नया टोला और संगत जैसे इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
जर्जर पाइपलाइन बनी बड़ी वजह
पीएचईडी की लापरवाही के कारण कई जगहों पर पाइपलाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कहीं पाइप नालियों में डूबे हैं तो कहीं सीवेज के बीच से गुजर रहे हैं। फुलवारीशरीफ मेन रोड पर तो पाइपलाइन मुख्य नाले के अंदर से डाली गई है, जिससे गंदा पानी लीक होकर सीधे घरों तक पहुंच रहा है।
30 हजार से ज्यादा लोग दूषित पानी पीने को मजबूर
फुलवारीशरीफ शहरी क्षेत्र में करीब 30 हजार की आबादी इस दूषित पेयजल से प्रभावित है। लोग मजबूरी में चापाकल से या उन घरों से पानी ला रहे हैं, जहां निजी स्तर पर पानी की व्यवस्था की गई है। गरीब परिवारों के पास यह विकल्प भी नहीं है।
कई इलाकों में फैल चुका है डायरिया
बीते वर्षों में कचहरी मोहल्ला, कसाब टोली और नया टोला जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में डायरिया फैल चुका है। गंदगी, नालियों का पानी और सीवेज रिसाव हालात को और गंभीर बना रहे हैं।
बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक दूषित पानी
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एनपी दीपक के अनुसार गंदे पानी में बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और खतरनाक रसायन मौजूद रहते हैं। इसके सेवन से दस्त, हैजा, टाइफाइड, पीलिया और कृमि संक्रमण जैसी बीमारियां होती हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में बार-बार होने वाला दस्त जानलेवा साबित हो सकता है।
टंकियों की सफाई वर्षों से नहीं हुई
फुलवारीशरीफ में लगी जलापूर्ति टंकियों की सालों से सफाई नहीं हुई है। नियमित जांच, पाइपलाइन की मरम्मत और पानी के शुद्धीकरण के बिना हालात सुधरने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।
शिकायत के बावजूद विभाग खामोश
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद पीएचईडी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह है कि गरीब परिवार मजबूरी में इसी दूषित पानी का सेवन कर रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं।