पटना हाईकोर्ट न्यूज़: विद्यालय कर्मियों की सेवा नियमित करने का आदेश, राज्य सरकार की तकनीकी दलीलें खारिज
पटना हाईकोर्ट ने सेवा नियमितीकरण से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि विद्यालय अधिग्रहण के समय कार्यरत कर्मचारियों की सेवा को केवल "गैर-स्वीकृत पद" का तकनीकी आधार बताकर खारिज नहीं किया जा सकता।
Patna - पटना हाइकोर्ट ने सेवा समाहितकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि विद्यालय अधिग्रहण के समय कार्यरत कर्मचारियों की सेवा को केवल “गैर-स्वीकृत पद” बताकर नकारा नहीं जा सकता। कोर्ट ने क्लर्क-सह-पुस्तकालयाध्यक्ष की सेवा नियमित करने और बकाया भुगतान का निर्देश दिया।
जस्टिस अजीत कुमार की एकलपीठ ने सुनील कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि टेकओवर एक्ट, 1981 की मंशा साफ है—अधिग्रहण की तिथि पर कार्यरत कर्मियों की सेवा राज्य में समाहित मानी जाएगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ललन कुमार ने दलील दी कि सुनील कुमार की नियुक्ति वर्ष 1982 में विधिवत हुई थी। वे 31 मार्च ,1991 को विद्यालय के सरकारी अधिग्रहण के समय कार्यरत थे।
15 मार्च ,1997 की निरीक्षण रिपोर्ट में भी उनकी सेवा की पुष्टि की गई है। समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को नियमित किया गया, ऐसे में भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। राज्य की ओर से जीपी-27 प्रभाकर झा ने तर्क दिया कि संबंधित पद स्वीकृत सूची में नहीं था और नियुक्ति सरकारी प्रतिबंध के बाद हुई थी। कोर्ट ने इस दलील को तकनीकी आधार बताते हुए खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि दशकों तक सेवा लेने के बाद राज्य इस आधार पर अधिकार से इनकार नहीं कर सकता। कोर्ट ने 29 अक्तूबर, 2012 तक का बकाया वेतन व सेवानिवृत लाभ तीन माह में देने का आदेश दिया।