मिशन कर्मयोगी: पटना में बदला सरकारी काम का अंदाज, ICAR के वैज्ञानिकों ने सीखी प्रोफेशनल एक्सीलेंस

पटना के ICAR-अटारी में 'राष्ट्रीय कर्मयोगी जनसेवा' कार्यक्रम संपन्न। 54 अधिकारियों ने सीखी कार्यस्थल नैतिकता और सेवा उन्मुखता। 80% प्रतिभागियों ने माना- प्रशिक्षण से बदला नजरिया।

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Patna -  पटना स्थित आईसीएआर-अटारी (ICAR-ATARI) संस्थान में 'राष्ट्रीय कर्मयोगी जनसेवा कार्यक्रम' का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। 27 जनवरी 2026 को आयोजित इस विशेष सत्र में आईसीएआर-आरसीईआर, पटना और क्षेत्रीय मक्का अनुसंधान एवं बीज उत्पादन केंद्र, बेगूसराय के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रशिक्षण शिविर में वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशासनिक कर्मचारियों सहित कुल 54 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 

मास्टर ट्रेनर्स ने सिखाए कार्यकुशलता के मंत्र

प्रशिक्षण सत्रों का प्रभावी संचालन मास्टर ट्रेनर्स डॉ. रोहन कुमार रमन और डॉ. सौरभ कुमार द्वारा किया गया। पूरे कार्यक्रम को चार प्रमुख मॉड्यूल में विभाजित किया गया था, जिनका उद्देश्य कर्मचारियों के भीतर सेवा उन्मुखता, कार्यस्थल नैतिकता, प्रभावी संप्रेषण और व्यावसायिक उत्कृष्टता को विकसित करना था। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को सिखाया गया कि कैसे एक सरकारी सेवक अपने दैनिक कार्यों में अधिक पेशेवर और मानवीय बन सकता है। 

निदेशक का संबोधन: सेवा भाव और आंतरिक शक्ति

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईसीएआर-अटारी के निदेशक डॉ. अंजनी कुमार ने सरकारी सेवा में 'सेवा परमो धर्म:' के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक सच्चे कर्मयोगी के निर्माण में पद की शक्ति से कहीं अधिक व्यक्ति की आंतरिक शक्ति और नैतिक सोच की भूमिका होती है। डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि जब कोई कर्मचारी सेवा भाव से कार्य करता है, तो वह संगठन और समाज दोनों के लिए प्रेरणास्रोत बन जाता है। 

सकारात्मक कार्य संस्कृति और 'कर्मयोगी क्षण'

संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. मोनोब्रुल्लाह ने संगठन के भीतर एक सकारात्मक और मूल्य-आधारित कार्य संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने "कर्मयोगी क्षणों" की अवधारणा को साझा करते हुए बताया कि कैसे छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव और निर्णय एक संस्थान की पूरी कार्यप्रणाली को बदल सकते हैं। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल पर एक सहायक और प्रेरणादायी माहौल तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना था। 

फीडबैक में दिखा बड़ा बदलाव और आभार प्रदर्शन

प्रशिक्षण के अंत में प्राप्त फीडबैक से कार्यक्रम की सफलता पर मुहर लग गई। आंकड़ों के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने माना कि इस सत्र के बाद उनके ज्ञान, काम करने के दृष्टिकोण और प्रेरणा स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यक्रम का औपचारिक समापन समन्वयक डॉ. डी. वी. सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया, जिसमें उन्होंने इस प्रशिक्षण को कार्य संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।