Bihar News : डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा इंदिरा गाँधी हृदय रोग संस्थान, पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया निर्देश, कहा- जल्द करें विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहाली

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने राज्य के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के भारी संख्या में खाली पड़े पदों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है......पढ़िए आगे

Bihar News : डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा इंदिरा गाँधी हृदय रो
बिहार सरकार को निर्देश - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने राज्य के इन्दिरा गाँधी ह्रदय रोग संस्थान में विशेषज्ञ डाक्टरों के रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय और जस्टिस सोनी श्रीवास्तव की खंडपीठ ने विकास कुमार उर्फ गुडडू बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस मामलें की सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जायेगी। साथ ही कोर्ट ने रिक्त पड़े पारा मेडिकल पदों को भी शीघ्र भरने का निर्देश दिया। पटना के प्रतिष्ठित इन्दिरा गांधी ह्रदय रोग संस्थान में विशेषज्ञ डाक्टरों के रिक्त पदों को भरने के लिए यह जनहित याचिका दायर की थी।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि बिहार राज्य में ह्रदय रोग से बड़ी तादाद में लोग पीडित है। राज्य में बहुत सारे छोटे बड़े अस्पताल हैं। लेकिन पटना का इन्दिरा गांधी ह्रदय रोग संस्थान ह्रदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए आशा का महत्वपूर्ण केन्द्र हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह अस्पताल राज्य में एकमात्र संस्थान हैं, जहां ह्रदय रोग के ईलाज की बेहतर व्यवस्था हैं। साथ ही इस अस्पताल में अच्छे और योग्य  विशेषज्ञ डाक्टर  हैं, जो मरीजों  ईलाज निपुणता से करते हैं।

उन्होंने  सूचना के अधिकार के तहत ये जानकारी प्राप्त की कि इस महत्वपूर्ण अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद बड़ी संख्या में रिक्त पड़े हैं। इससे पूरी चिकित्सा व्यवस्था  प्रभावित हो रही हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता  विकास चन्द्र ने कोर्ट को बताया यह अस्पताल बिहार राज्य की जनता के लिए बहुत महत्व का हैं। इसमें उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हैं।  

उन्होने  बताया कि यह अस्पताल तभी पूर्ण रूप सो कार्य कर सकता हैं,जबकि यहां विशेषज्ञ डाक्टर के सभी स्वीकृत पद को,जो रिक्त पड़े हो,को भरा जाए। साथ ही पारा मेडिकल स्टाफ के काफी पद रिक्त  हैं,जिन्हें प्राथमिकता के स्तर भरा जाना चाहिए। राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों को इस सन्दर्भ में पत्र लिखा गया,पर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। इसलिए ये जनहित याचिका दायर किया गया। इस मामलें पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।