भरत तिवारी मामले में मुख्य सचिव से मिले जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष, कहा- यह एनकाउंटर नहीं, प्रशासन द्वारा की गई हत्या है

भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले को लेकर जन सुराज पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर उन्हें इस घटना की 'फर्स्ट हैंड' ग्राउ

भरत तिवारी मामले में मुख्य सचिव से मिले जन सुराज के प्रदेश अ
भरत तिवारी मामले में मुख्य सचिव से मिले जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष- फोटो : नरोत्तम कुमार

Patna : भोजपुर के भरत तिवारी मामले को लेकर बिहार में सियासी और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को बिहार के मुख्य सचिव से मुलाकात की। इस दौरान नेताओं ने भोजपुर में कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की मौत, राज्य में बढ़ती नृशंस हत्याओं और पुलिसिया अत्याचार के गंभीर मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को इस पूरे मामले से संबंधित एक 7 सूत्री मांग पत्र भी सौंपा।


मौके पर जाकर देखी सच्चाई, निर्दोष की सरेआम हत्या अक्षम्य: मनोज भारती

मुख्य सचिव से मुलाकात के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी की मौत कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या है। उन्होंने बताया कि जन सुराज के नेताओं ने घटनास्थल पर जाकर 'फर्स्ट हैंड' रिपोर्टिंग और तथ्य जुटाए हैं, जिसे मुख्य सचिव के सामने रखा गया है। भारती ने कहा कि भरत तिवारी वर्षों से समाज सेवा में सक्रिय थे और खुद प्रशासन ने उन्हें कई बार सम्मानित किया था; ऐसे व्यक्ति की सरेआम हत्या करने वाले अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।


भरत तिवारी कोई नक्सली नहीं था, फिर एसटीएफ को क्यों भेजा: पूर्व विधायक किशोर कुमार

वहीं प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व विधायक किशोर कुमार ने सरकार की नीयत और एसटीएफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसटीएफ का गठन संगठित अपराध और नक्सलियों से निपटने के लिए किया जाता है, किसी आम सामाजिक कार्यकर्ता के खिलाफ नहीं। उन्होंने गृहमंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए सवाल किया कि जब भरत तिवारी कोई दुर्दांत अपराधी या नक्सली नहीं था, तो वहां एसटीएफ को क्यों भेजा गया? किशोर कुमार ने सम्राट चौधरी के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हुए इस कथित फर्जी मुठभेड़ की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और भविष्य में ऐसे एनकाउंटरों पर रोक लगाने की मांग की।


भोजपुर एसपी को सस्पेंड करने, 1 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग

जन सुराज पार्टी ने मुख्य सचिव के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि सरकार इसे एनकाउंटर कहना बंद करे और प्रशासनिक हत्या स्वीकार करे। इसके साथ ही निष्पक्ष जांच के लिए भोजपुर के एसपी, डीएसपी सहित संलिप्त सभी अधिकारियों को तुरंत निलंबित करने और उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराने की मांग की गई। पार्टी ने पीड़ित परिवार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज करने, परिवार को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा देने और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की वकालत की। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व एमएलसी रामबली चंद्रवंशी, सुभाष कुशवाहा, नरेंद्र प्रसाद मंडल, पद्मा ओझा और जीतेंद्र ओझा सहित कई नेता शामिल थे।

नरोत्तम की रिपोर्ट