अनुदान नहीं, अब वेतनमान चाहिए : विधान परिषद में एमएलसी जीवन कुमार की दहाड़: खंडहर हो रहे स्कूल, शिक्षकों का भविष्य अंधकार में, सरकार ने गठित की हाई लेवल कमिटी

बिहार विधान परिषद में वित्तरहित संस्थानों की बदहाली का मुद्दा गूंजा। भाजपा एमएलसी जीवन कुमार ने अनुदान के बदले वेतनमान की मांग उठाई, जिसके जवाब में सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमिटी गठित करने की जानकारी दी है।

अनुदान नहीं, अब वेतनमान चाहिए : विधान परिषद में एमएलसी जीवन

Patna - बिहार विधान परिषद में आज वित्तरहित शिक्षण संस्थानों और वहां कार्यरत शिक्षकों के भविष्य को लेकर जोरदार बहस हुई। भाजपा एमएलसी श्री जीवन कुमार ने सदन में संकल्प पेश करते हुए सरकार से मांग की कि वित्तरहित स्कूलों और कॉलेजों को 'अनुदान' (Grant) के बजाय 'वेतनमान' (Pay Scale) दिया जाए।

"खंडहर में तब्दील हो रहे संस्थान" 

सदन में अपनी बात रखते हुए एमएलसी जीवन कुमार ने कहा कि उन्होंने सैकड़ों ऐसे संस्थानों का दौरा किया है, जिनकी स्थिति आज 'खंडहर' जैसी हो गई है। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि जब बिहार में सरकारी शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई थी, तब समाज के बुद्धिजीवियों और दानदाताओं ने अपनी पूंजी लगाकर ये स्कूल खोले थे।

जीवन कुमार ने कहा, "सरकार का ध्यान सरकारी स्कूलों को ठीक करने पर तो है, जिसके लिए हम मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देते हैं, लेकिन उन संस्थानों का क्या जिन्होंने मुश्किल वक्त में बिहार की शिक्षा को संभाला? अब समय आ गया है कि सरकार इन्हें अनुदान के भरोसे न रखकर, शिक्षकों के लिए एक निश्चित वेतन संरचना (Pay Structure) लागू करे।"

सरकार का जवाब

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमिटी गठित एमएलसी जीवन कुमार के संकल्प का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार ने सदन को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशील है। मंत्री ने जानकारी दी कि वित्तरहित संस्थानों (स्कूल, कॉलेज, मदरसा, संस्कृत विद्यालय) की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया गया है।

मंत्री ने आश्वासन दिया कि जैसे ही यह कमिटी अपनी रिपोर्ट और अनुशंसा सरकार को सौंपेगी, सरकार उस पर विचार कर ठोस निर्णय लेगी।

"दवा के दाम के चक्कर में पूत की आंख न चली जाए" 

चर्चा के दौरान यह मुद्दा भी जोर-शोर से उठा कि कमिटी की बैठक कब होगी और रिपोर्ट कब आएगी? वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि "जब तक दवा का दाम बुझिये, तब तक पूत की आंखें गायब हो जाएं।" यानी रिपोर्ट आने में इतनी देर न हो जाए कि संस्थान ही खत्म हो जाएं।

सरकार के ठोस आश्वासन और कमिटी द्वारा जल्द निर्णय लिए जाने के भरोसे के बाद, एमएलसी जीवन कुमार ने अपना संकल्प वापस लिया। उन्होंने बाद में कहा कि सदन में सरकार ने माना है कि कमिटी काम कर रही है और हम शिक्षकों को उनका हक़ दिलाकर ही रहेंगे।

Report - vandana sharma