पटना के नौबतपुर सीडीपीओ कार्यालय में तालाशाही : सुरक्षा का बहाना या निगरानी की कार्रवाई के बाद जनता से बचने का रास्ता?
पटना के नौबतपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित सीडीपीओ कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में है। बीते 20 मई को विजिलेंस द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर को घूस लेते गिरफ्तार करने के बाद, कार्यालय प्रशासन ने 'सुरक्षा' का हवाला देकर दफ्तर के मुख्य गेट
Patna : जिले के नौबतपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना (सीडीपीओ) कार्यालय इन दिनों अपनी अजब-गजब और मनमानी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में है। दफ्तर का मुख्य चैनल गेट स्थायी रूप से बंद कर और उस पर ताला लटकाकर अंदर काम निपटाया जा रहा है। सरकारी नियमों के मुताबिक सभी सार्वजनिक दफ्तर आम जनता की समस्याओं के निवारण के लिए खुले रहने चाहिए। इसके विपरीत, यहाँ आने वाले ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों को बाहर तेज धूप में खड़े होकर पहरेदारों की तरह आवाज लगानी पड़ती है, तब जाकर अंदर से कोई कर्मी गेट खोलता है।
निगरानी की रेड में रिश्वतखोर ऑपरेटर के पकड़े जाने के बाद बदला नियम
सरकारी कार्यालय प्रशासन इस अजीबोगरीब व्यवस्था को 'सुरक्षा व्यवस्था' का नाम दे रहा है, लेकिन क्षेत्र में चर्चा है कि हकीकत कुछ और ही है। दरअसल, यह सख्त कदम बीते 20 मई को निगरानी विभाग (Vigilance Department) द्वारा दफ्तर के एक कंप्यूटर ऑपरेटर को 37,100 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचे जाने के बाद उठाया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग अपनी कमियों और भ्रष्टाचार के दाग को छुपाने के लिए अब आम जनता से दूरी बना रहा है।
हंगामे का डर बताकर गेट बंद रखने का तर्क सरकारी नियमों के खिलाफ
इस पूरे मामले पर सीडीपीओ पदाधिकारी का तर्क है कि निगरानी की कार्रवाई के बाद कोई भी बाहरी व्यक्ति या शिकायतकर्ता अंदर आकर बेवजह हंगामा खड़ा कर सकता है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से मुख्य गेट को बंद रखा गया है। हालांकि, उनका यह तर्क पूरी तरह तर्कहीन और सरकारी सेवा नियमावली के खिलाफ प्रतीत होता है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर अधिकारियों को वाकई जान-माल का खतरा है, तो उन्हें स्थानीय पुलिस प्रशासन से सुरक्षा गार्ड की मांग करनी चाहिए, न कि पूरे दफ्तर को ही बंद कर देना चाहिए।
घंटों बाहर इंतजार करने को मजबूर हैं सुदूर देहात से आई जरूरतमंद महिलाएं
इस 'तालाशाही' के कारण सबसे ज्यादा परेशानी सुदूर ग्रामीण इलाकों से अपनी फरियाद लेकर आने वाली गरीब महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। सुमंती देवी जैसी कई जरूरतमंद महिलाएं अपनी छोटी-मोटी समस्याओं और योजनाओं का लाभ लेने के लिए दफ्तर के बाहर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सरकारी दफ्तर को किसी निजी संपत्ति की तरह इस तरह ताला बंद करके नहीं चलाया जा सकता, जिससे जनता और प्रशासन के बीच संवाद ही खत्म हो जाए।
वरिष्ठ अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप कर गेट खुलवाने की मांग तेज
नौबतपुर के स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और आईसीडीएस (ICDS) के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दफ्तर के मुख्य द्वार से अविलंब ताला हटवाया जाए ताकि आम जनता बिना किसी डर और रुकावट के अपनी शिकायतों को अधिकारियों के सामने रख सके। अब देखना यह है कि इस मनमानी पर वरिष्ठ अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं और जनता को इस परेशानी से कब तक राहत मिलती है।
सुमित की रिपोर्ट