रिश्वतखोरी के मामले में मधुबनी के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी को 4 साल की सजा, विशेष निगरानी अदालत ने सुनाया फैसला
Patna : निगरानी अन्वेषण ब्यूरो बिहार द्वारा दर्ज रिश्वतखोरी के मामले में विशेष निगरानी अदालत, मुजफ्फरपुर ने कड़ा रुख अपनाते हुए फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश दशरथ मिश्रा की अदालत ने मधुबनी जिले के रहिका प्रखंड में पदस्थापित रहे तत्कालीन राजस्व कर्मचारी नारायण झा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 5,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ हुआ था गिरफ्तार
यह मामला वर्ष 2014 का है, जब मधुबनी के सुजीत कुमार ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी का आरोप था कि अंचलाधिकारी को रिपोर्ट भेजने के एवज में राजस्व कर्मचारी नारायण झा 5,000 रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है। निगरानी की टीम ने 19 मई 2014 को जाल बिछाकर आरोपी कर्मचारी को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक नारायण सिंह द्वारा मामले में समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया गया और अभियोजन पक्ष ने कुल 9 गवाह पेश किए।
अदालत ने सुनाई अलग-अलग धाराओं में सजा
विशेष लोक अभियोजक कृष्ण देव साह के प्रभावी तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दोषी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास व 5,000 रुपये जुर्माना और धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत 4 वर्ष के सश्रम कारावास व 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा न करने पर एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
2026 में अब तक 18 भ्रष्ट अधिकारियों को हो चुकी है सजा
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में 27 अगस्त तक भ्रष्टाचार के कुल 18 मामलों में अदालत द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। सजा पाने वालों में रेंज ऑफिसर, कार्यपालक अभियंता, अंचलाधिकारी (CO), थाना प्रभारी और ब्लॉक शिक्षा पदाधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। वर्ष 2025 में कुल 30 मामलों में सजा हुई थी, जबकि 2026 के शुरुआती 8 महीनों में ही 18 मामलों में दोषसिद्धि हो चुकी है।
पिछले 26 वर्षों में अगस्त माह तक रिकॉर्ड कार्रवाई
निगरानी विभाग की आक्रामक पैरवी और त्वरित कार्रवाई के चलते 2026 के अगस्त माह तक दोषसिद्धि की यह संख्या पिछले 26 वर्षों में सबसे अधिक दर्ज की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ अदालती पैरवी को और मजबूत किया गया है, ताकि भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाकर सजा दिलाई जा सके।
अनिल की रिपोर्ट