Magahi Festival 2026: पटना में आज से ‘मगही महोत्सव 2026’ शुरू, भाषा-संस्कृति के संगम का मंच बनेगा बापू टावर

Magahi Festival 2026: प्राचीन मगध की समृद्ध भाषा और संस्कृति को नई पहचान देने के उद्देश्य से राजधानी पटना एक बार फिर सांस्कृतिक रंग में रंगने जा रही है। आज से ‘मगही महोत्सव 2026’ का आगाज हो रहा है।

मगही महोत्सव 2026
मगही महोत्सव 2026 आज से शुरु - फोटो : News4nation

Magahi Festival 2026: राजधानी पटना के गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में 28 और 29 मार्च को दो दिवसीय ‘मगही महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव का उद्देश्य मगही भाषा, साहित्य, लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। आयोजन समिति के अनुसार, महोत्सव का शुभारंभ गया घराने की शास्त्रीय गायकी से होगा, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। पहले दिन विभिन्न विषयों पर विमर्श और परिचर्चा के सत्र आयोजित होंगे, जिनमें मगही भाषा की समृद्ध परंपरा और इतिहास पर चर्चा की जाएगी।

प्रेम कुमार करेंगे उद्घाटन 

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार करेंगे। वहीं, विशिष्ट अतिथियों में मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि (IAS), महेंद्र कुमार (IAS) और ‘सुपर 30’ के संस्थापक आनंद सहित कई गणमान्य हस्तियां शामिल होंगी। महोत्सव के दूसरे दिन को मगही सिनेमा और संगीत के इतिहास को समर्पित किया गया है। इस दौरान ‘मगही फिल्म फेस्टिवल’ के तहत 50 से अधिक लघु फिल्मों में से चयनित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा और तीन श्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कृत किया जाएगा। 

भैया व स्वाहा की विशेष स्क्रीनिंग 

समापन सत्र में चर्चित मगही फिल्म ‘भैया व स्वाहा’ की विशेष स्क्रीनिंग भी होगी। इसके अलावा आयोजन स्थल पर मगध क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों की फोटो प्रदर्शनी और मगही भाषा की पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। रूपक सिन्हा, जितेंद्र कुमार और जुलकर नैन जैसे फोटो जर्नलिस्ट अपनी विशेष प्रदर्शनी पेश करेंगे।

मगही को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने की पहल 

संयोजक रविशंकर उपाध्याय, विजेता चंदेल और उज्ज्वल कुमार ने बताया कि महोत्सव में लोक गायन, मगही कवि सम्मेलन और युवा उद्यमियों के साथ संवाद जैसे कार्यक्रम भी होंगे, जिनके जरिए नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। आयोजन समिति का कहना है कि ‘मगही महोत्सव 2026’ सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि मगही भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।