Bihar News : बिहार में निजी कंपनिया भी चला सकेगी चीनी मिलें, कानून में संशोधन करेगी सरकार, प्रस्ताव को कैबिनेट से मिली मंजूरी
Bihar News : राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को निजी कंपनियों के माध्यम से चलाने के लिए राज्य सरकार बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) अधिनियम 1985 की धारा 3 में संशोधन कर दिया है.....पढ़िए आगे
PATNA : बिहार सरकार ने राज्य में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में 'बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) अधिनियम 1985' की धारा-3 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस कानूनी बदलाव का मुख्य उद्देश्य बंद पड़ी मिलों को निजी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं को सौंपकर उन्हें फिर से कार्यशील बनाना है, ताकि राज्य के गन्ना किसानों और मजदूरों को नया जीवन मिल सके।
गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार, 1985 में जब चीनी मिलों का अधिग्रहण किया गया था, तब यह अनिवार्य किया गया था कि अधिग्रहित मिलों का संचालन केवल राज्य सरकार ही करेगी। इस पुराने नियम के कारण सरकार चाहकर भी बंद पड़ी इकाइयों को निजी या सहकारी संस्थाओं को नहीं दे पा रही थी। समय के साथ सरकारी मिलें घाटे के कारण धीरे-धीरे बंद होती गईं और यह कानूनी बाध्यता उन्हें पुनर्जीवित करने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन गई थी।
कैबिनेट द्वारा अधिनियम की धारा-3 की उपधारा-2 में संशोधन की स्वीकृति मिलने के बाद अब संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस संशोधन के प्रभावी होने से अब कोई भी सक्षम निजी कंपनी, राज्य संपोषित संस्था या सहकारी समितियां इन मिलों को चलाने के लिए आगे आ सकेंगी। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र के निवेश और आधुनिक तकनीक के आने से इन मिलों की पेराई क्षमता बढ़ेगी और बिहार के चीनी उद्योग में एक नई प्रतिस्पर्धा पैदा होगी।
इस फैसले का सीधा असर बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों गन्ना किसानों पर पड़ेगा। मिलें बंद होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे राज्यों या दूर-दराज के इलाकों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती थी। अब स्थानीय स्तर पर मिलों के खुलने से न केवल उन्हें गन्ने का उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार कभी देश का प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य हुआ करता था, लेकिन कानूनी अड़चनों और सरकारी उदासीनता ने इसे पिछड़ा बना दिया। अब संशोधन के बाद, सरकार का अगला लक्ष्य बंद पड़ी मिलों की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कर जल्द से जल्द निविदा (Tender) प्रक्रिया शुरू करना है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले कुछ पेराई सत्रों में बिहार की कई बंद पड़ी चीनी मिलों की चिमनियों से एक बार फिर धुआं निकलता दिखाई देगा।