गन्ना मंत्री का बड़ा एलान : बंद चीनी मिलें खोलने को मंजूरी, राज्य में बनेगा देश का पहला अनूठा मॉडल जहां चीनी के साथ एथेनॉल और बिजली का भी होगा उत्पादन
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा कि सीएम सम्राट ने राज्य में बंद चीनी मिलों को दोबारा खोलने और नई 'शुगरकेन नीति' को मंजूरी दे दी है। सरकार ने चीनी मिलों को 'मॉडल कॉम्प्लेक्स' के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है
Patna : बिहार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने राज्य के लिए बड़े ऐतिहासिक फैसलों का एलान किया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और 'मॉडल कॉम्प्लेक्स शुगर मिल' की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इस दूरगामी नीति के तहत निवेशकों को महज 1 रुपये की टोकन मनी पर 30 साल के लिए लीज पर जमीन दी जाएगी। बिहार देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां चीनी मिलों के माध्यम से चीनी के साथ-साथ सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस), एथेनॉल और बिजली का भी उत्पादन एक साथ किया जाएगा।
देश का पहला अनूठा मॉडल, चीनी के साथ एथेनॉल और बिजली का भी होगा उत्पादन
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बताया कि आज का दिन बिहार के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है। सरकार ने चीनी मिलों को 'मॉडल कॉम्प्लेक्स' के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इस नए और आधुनिक मॉडल के तहत चीनी मिल परिसर में ही सीबीजी (CBG), एथेनॉल और विद्युत (बिजली) का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा। ऐसा एकीकृत ढांचा तैयार करने वाला बिहार पूरे देश का पहला राज्य बनेगा, जिससे राज्य में ऊर्जा और ईंधन के क्षेत्र में बड़ा आत्मनिर्भर बदलाव आएगा।
बंद चीनी मिलों को खोलने का बड़ा निर्णय, नवंबर में पीएम मोदी रखेंगे नींव
राज्य में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों के दिन अब बहुरने वाले हैं। मंत्री संजय कुमार ने बताया कि सरकार ने इन बंद मिलों को दोबारा चालू करने का पक्का निर्णय ले लिया है। सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस साल के अंत तक कम से कम पांच चीनी मिलों के उद्घाटन या पुनरुद्धार की प्रक्रिया धरातल पर दिखने लगेगी। उन्होंने एक बड़ा अपडेट देते हुए कहा कि आगामी नवंबर महीने में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं बिहार आकर इन चीनी मिलों के आधुनिकरण और स्थापना की आधारशिला (नींव) रखेंगे।
1 रुपये के टोकन पर 30 साल की लीज, नई शुगरकेन नीति को मिली हरी झंडी
निवेशकों को बिहार की ओर आकर्षित करने और चीनी उद्योग को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार बेहद उदार नीतियां लेकर आई है। नई शुगरकेन (गन्ना) नीति के तहत मिलों की स्थापना के लिए निवेशकों को 30 वर्षों की लंबी अवधि के लिए जमीन लीज पर दी जाएगी। सबसे खास बात यह है कि इस जमीन के एवज में निवेशकों से महज 1 रुपये की टोकन मनी ली जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा इस क्रांतिकारी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आने का रास्ता साफ हो गया है।
नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए 70 करोड़ तक की सरकारी सहायता का प्रावधान
गन्ना मंत्री ने नई नीति के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में न्यूनतम 3,500 टीसीडी (TCD - टन क्रशिंग पर डे) क्षमता वाली नई चीनी मिल स्थापित करने पर सरकार द्वारा 70 करोड़ रुपये तक की भारी वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता राशि निवेशकों को 5 आसान किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, यदि कोई निवेशक 3,500 टीसीडी क्षमता से ऊपर मिल का विस्तार करता है, तो उसे प्रत्येक अतिरिक्त 100 टीसीडी की क्षमता पर 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सरकारी मदद दी जाएगी।
भूमि निबंधन शुल्क की 100% प्रतिपूर्ति करेगी राज्य सरकार
उद्यमियों को जमीन संबंधी प्रक्रियाओं में राहत देने के लिए भी सरकार ने बड़ा एलान किया है। मंत्री संजय कुमार के अनुसार, नई चीनी मिल की स्थापना करने अथवा वर्तमान मिलों के क्षमता विस्तार (कैपेसिटी एक्सपेंशन) के लिए खरीदी जाने वाली भूमि पर लगने वाले निबंधन शुल्क (रजिस्ट्रेशन फीस) की शत-प्रतिशत (100%) राशि की प्रतिपूर्ति (रिइंबर्समेंट) राज्य सरकार खुद करेगी। इस नीतिगत छूट से निवेशकों पर शुरुआती वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा और बिहार में बहुत जल्द बंद पड़ी चीनी मिलें पूरी क्षमता के साथ धड़कने लगेंगी।
नरोत्तम की रिपोर्ट