Manju Verma Case: पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति को 7-7 साल की सजा, कोर्ट से जेल भेजे गए
बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को विशेष MP-MLA कोर्ट ने 2018 के चेरिया बरियारपुर आर्म्स एक्ट मामले में 7-7 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के बाद दोनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
बिहार सरकार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को शनिवार को अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने बहुचर्चित चेरिया बरियारपुर थाना कांड में सुनवाई पूरी करते हुए दोनों को अवैध हथियार रखने के मामले में दोषी करार दिया। अदालत ने इस मामले में कठोर रुख अपनाते हुए दोनों पति-पत्नी को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है।
अवैध हथियार और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज हुआ था मामला
यह पूरा विवाद गैर-कानूनी तरीके से अपने पास हथियार और कारतूस रखने से जुड़ा हुआ था। विशेष न्यायाधीश बृज कुमार की अदालत ने अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों को विस्तार से सुना। मामले में प्रस्तुत सभी डिजिटल और भौतिक सबूतों के आधार पर अदालत ने दोनों को आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना और 7 साल की जेल की सजा तय की।
सजा का ऐलान होते ही पुलिस कस्टडी में लिए गए पति-पत्नी
अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद ही सुरक्षाकर्मियों ने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को अपनी हिरासत में ले लिया। कोर्ट परिसर में आवश्यक कानूनी कागजी औपचारिकताएं पूरी की गईं, जिसके पश्चात दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर थाने में 2018 में दर्ज हुई थी FIR
सरकारी वकील संतोष कुमार ने इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी मीडिया से साझा की। उन्होंने बताया कि यह मामला साल 2018 में बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर थाने में दर्ज किया गया था। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के दौरान सीबीआई की छापेमारी में उनके आवास से कारतूस बरामद हुए थे, जिसके बाद से यह मामला अदालत में विचाराधीन था।
लगभग आठ वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया का हुआ अंत
लंबी जांच प्रक्रिया, गवाहों के बयानों और सालों तक चली सुनवाई के बाद आखिरकार शनिवार को अदालत ने इस पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया। फैसला आने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लगभग आठ वर्षों तक चले इस मामले में अदालत के फैसले ने यह संदेश दिया है कि कानून के समक्ष सभी समान हैं।